अस्मा उल हुस्ना ( अल्लाह के 99 खूबसूरत नाम)

अस्मा उल हुस्ना अल्लाह के खूबसूरत नाम हैं। संरचनात्मक गुण जो वे निरूपित करते हैं वे समद से संबंधित हैं। ये नाम समय और स्थान से परे क्वांटम क्षमता को देखते हैं। नाम बिंदु को दर्शाते हैं। इस प्रकार, नाम और उनके अर्थ अकेले अल्लाह के हैं और मानवीय अवधारणाओँ से बद्ध होने से मुक्त हैं।

आइये अस्मा उल हुस्ना और उसके पढ़ने के फायदे जानते हैं।

हु-अल्लाहु (परवर दीगार का ज़ाती नाम)

अज़्म व यकीन की कुव्वत के लिए रोजाना एक हज़ार मर्तबा पढ़ें।

ला इलाज मरीज़ या अल्लाहो का बकसरत विर्द करके शिफ़ा की दुआ मांगे, इनशा अल्लाह शिफ़ा होगी।

इसे भी पढ़ें – कुल हुअ अल्लाहु अहद। सूरह इख़लास, तफसीर और तर्जुमा।

अर्र-रहमानो (बहुत रहम वाला)

हर नमाज़ के बाद सौ मर्तबा या रहमानो पढ़ने वाले के दिल की सख्ती और गफलत जाती रहेगी।

अर्र-रहीम (बड़ा मेहरबान)

रोजाना हर नमाज़ के बाद 100 मर्तबा या रहीम का विरद करने वाला दुनियावी आफत से इनशा अल्लाह महफ़ूज़्र रहेगा और मखलूके खुदा उस पर मेहरबान होगी।

अल-मलिको (हक़ीक़ी बादशाह)

बाद नमाज़े फ़जर रोजाना कसरत से पड़ने वाले को इनशा अल्लाह अल्लाह ताला ग़नी फ़रमाएगा

अल-कुद्दूस (बुराइयों से पाक ज़ात)

जवाल के बाद रोजाना बकसरत विरद करने वाले का दिल इनशा अल्लाह रूहानी एमआरज़ेड से पाक हो जाएगा।

आस-सलामो (बे ऐब ज़ात)

इस नाम का विरद करने वाला इनशा अल्लाह ताला तमाम आफतों से महफूज रहेगा। 115 मर्तबा इसे पढ़कर बीमार पर दम करें अल्लाह ताला उसे सेहत आता फ़रमाएगा।

अल-मोमिन (ईमान व अमन बकस्ने वाला )

किसी खौफ के वक़्त 630 मर्तबा पढ़ने से इनसा अल्लाह नुकसान व खौफ से महफूज रहें।

इसका पढ़ने वाला या लिखकर रखने अल्लाह ताला के अमान में रहेगा।

अल-मुहाइमीनो (निगहबान रहने वाला)

बाद ग़ुस्ल दो रकत नामज के बाद जो भी इस इस इस्म को एक मर्तबा पढे अल्लाह ताला उसका ज़ाहिर व बातिन पाक कर देगा।   

और जो शख्स एक सौ पंद्रह मर्तबा इस इस्म का विरद करेगा इनशा अल्लाह ताला पोशीदा चीजों पर मुटल्ला हो।

अल-अज़ीज़ (सब पर ग़ालिब)

40 दिन तक 40 मर्तबा जो शख्स ये इस्म पढे अल्लाह ताला मु-अज़्ज़िज़ और मुत-अन्नी होगा।

जो शख्स नमाज़े फ़जर के बाद के बाद ये इस्म वो इनसा अल्लाह किसी का मोहताज न होगा।

अल-जब्बार (सब से ज़बरदस्त)

जो शख्स चांदी की अंगूठी पर ये इस्म नक़्श करके पहने वह उसकी हैबत और शकत दूसरे लोगो पर होगी।

जो शख्स रोजाना सुबह व शाम 226 मर्तबा इस इस्म का विरद करे इनशा अल्लाह ज़ालिमों के कहर से बचा रहेगा।

अल-मुतकब्बिर (बड़ाई और बुजुरगी वाला)

अगर कोई शख्स किसी काम की इबटेदा में ये इस्म बकसरत पढे तो इनशा अल्लाह बड़ी कामयाबी हासिल होगी। बकसरत विरद करने वाले को अल्लाह इज्ज़त व बड़ाई हासिल फरमाइएगा।

अल-ख़ालिक़ (पैदा करने वाला)

सात रोज़ मुतवातिर एक सौ मर्तबा ये इस्म पढ़ने वाला इनशा अल्लाह ताला तमाम आफतों से बच जाएगा।

इसका लगातार विरद करते रहसे से चेहरा मुनव्वर रहता है।

अल-बारी (जान डालने वाला)

बांझ औरत अगर सात रोज़े रखे और पानी से इफ़तार करके रोज़ाना 21 मर्तबा अल-बारीओ अल-मुसव्विरो इनशा अल्लाह ताला औलाद नसीब होगी।

अल-मुसव्विरो (सूरत देने वाला)

 बांझ औरत अगर सात रोज़े रखे और पानी से इफ़तार करके रोज़ाना 21 मर्तबा अल-बारीओ अल-मुसव्विरो इनशा अल्लाह ताला औलाद नसीब होगी।

अल-गफ़्फ़ार (मगफिरत करने वाला)

जो शख्स रोज़ाना बाद नमाज़े असर या गफ़्फ़ारो अगफिरली पढे इनशा अल्लाह ताला बख्शे जाने वाले लोगों में शुमार होगा।

अल-कहहार (सबको काबों करने वाला)

या कहहार का विरद करने वाले के दिल से दुनिया की मुहब्बत खत्म होकर अल्लाह की मुहब्बत आ जाएगी।

अल वहहाब (सबको आता करने वाला)

फिक्र व फाका में गिरफ्तारया वहहाब का बाकसरत विरद करे या चाश्त की नमाज़ के आखिरी सजड़े में 40 मर्तबा पढे तो इनशा अल्लाह फिक्र व फाका से निजात मिलेगी।

अगर कोई खास हाजत दारपेश हो तो घर या मस्जिद के सहन में 3 बार सज्दे करके 100 मर्तबा इस इस्म को पढ़ें इनशा अल्लाह ताला हाजत ज़रूर पूरी होगी   

अर-रज़्ज़ाक (सब को रिज्क देने वाला)

फ़जर नमाज़ के पहले जो शख्स अपने घर के चरो कोनों में 10-10 मर्तबा ये इस्म पढ़ कर दम करें तो उस घर में बीमारी और मुफ़लिसी न आएगी। क़िबला की तरफ मुंह करके दायें कोने से शुरू करें।

अल फत्ताह (मुश्किल कुशा)

नमाज़े फ़जर के बाद सीने पर हाथ बाँध कर 70 मर्तबा ये इस्म पढ़ने से दिल ईमान के नूर से मुनव्वर हो जाता है।

अल अलीम (वसी इल्म रखने वाला)

इस इस्म के बकसरत विरद करने वाले पर अल्लाह ताला इल्म व मार्फत के दर कुशादा कर देता है।

अल- क़ाबिज़ (रोज़ी तंग करने वाला)

रोटी के चार लुक़मों पर लिख कर मुतवातिर 40 दिन तक खाने वाला इनशा अल्लाह ताला भूक, प्यास, जख्म, और दर्द वगैरा की तकलीफ से महफूज रहेगा।

अल बासित ( रोज़ी फराख करने वाला)     

चाश्त के नमाज़ पढ़ने के बाद आसमान की तरफ हाथ उठाकर रोज़ाना दस मर्तबा ये इस्म पढ कर मुंह पर हाथ फेर ले तो फेर ले तो इनशा अल्लाह ऐसा शख्स किसी का कभी मोहताज न होगा।

अल- खाफ़िज़ (पस्त करने वाला)

 जो शख्स रोज़ाना 500 मर्तबा ये इस्म पढ़ेगा अल्लाह ताला उसकी मुराड पूरी और मुश्किलात पूरी फरमाएगा।

जो शख्स 3 रोज़े रखे और चौथे रोज अलग जगह होकर ये इस्म 70 मर्तबा पढे तो इनशा अल्लाह दुश्मन पर फतहयाब होगा।

अर- राफि (बुलंद करने वाला)

जो शख्स हर माह की चौदहवीं शब को आधी रात के वक़्त एक सौ मर्तबा ये इस्म पढे तो अल्लाह ताला उसे मख़लूक़ से बेनियाज़ व मुस्तगनी कर देगा।

अल मुईज्जो ( इज्ज़त देने वाला)

पीर या जुमा के दिन बाद नमाज़े मगरीब जो शख्स इस इस्म को 40 मर्तबा पढ़ता रहे अल्लाह तबारक व ताला उसे लोगों में बाइज्ज़त व बावकार बना देगा।

अल-मुजील्लो (ज़िल्लत देने वाला)

जो शख्स 75 मर्तबा या मुजील्लो पढ़कर सजड़े में जाकर दुआ करे अल्लाह ताला ज़ालिमों, हासिदों और दुश्मनों से उसे महफूज रखेगा।

अस-समिओ (सब कुछ सुनने वाला)

जुमेरात के दिन चाश्त की नमाज़ पढ़ने के बाद 500 या 100 या 50 मर्तबा जो शख्स ये इस्म पढ़ेगा, इनशा अल्लाह ताला उसकी सारी जायज़ दुयाएन कुबूल होंगी। पढ़ने के दौरान किसी से बात न करे।

जो शख्स फ़जर नमाज़ की सुन्नत और फर्ज़ के दरमियान 100 मर्तबा ये इस्म पढ़ेगा अल्लाह ताला उसे खास नज़र से नवाज़ेगा।

अल-बसीर (सबकुछ देखने वाला)

जो शख्स नमाज़े जुमा के बाद 100 मर्तबा ये इस्म पढ़ेगा तो अल्लाह ताला उसके दिल में नूर और आँखों में रोशनी पैदा करेगा।

अल-हकम (हाकिमे मुतल्लक)

आखिर शब में बावजू होकर 99 मर्तबा इस इस्म के पढ़ने वाले का दिल इनशा अल्लाह ताला महले इसरार व नूर होगा।

जो शख्स जुमे की रात को इस इस्म को इस कदर पढे की उसमे बेसुघ हो जाए तो इनशा अल्लाह ताला उसका दिल कश्फ़ व इल्हाम का मरकज़ हो जाएगा।

अल-अद्ल (सबसे ज्यादा इंसाफ करने वाला)

जो शख्स जुमे के दिन या जुमे की रात को रोटी के 20 टुकड़ों पर ये इस्म लिख कर खाएगा अल्लाह ताला उसके लिए मख़लूक़ को मुसख्खर कर देगा।

अल-लतीफ (सबसे ज्यादा लुत्फ लेने वाला)

133 मर्तबा ये इस्म पढ़ने वाले के रिज्क में बरकत होगी और उसके सारे काम बखूबी हो जाएंगे।

फिक्र व फाका, दुख मुसीबत और परेशानी में मुब्तला शख्स किसी वक़्त अच्छी तरह वज़ू करके दोगाना पढ़कर दिल में मकसद का ख्याल रखकर 100 मर्तबा ये इस्म पढे इनशा अल्लाह ताला कामयाबी होगी।

अल-खबीर (बाखबर – सबकी खबर रखने वाला)    

7 रोज़ तक जो शख्स बकसरत ये इस्म पढ़ेगा उस पर इनशा अल्लाह ताला सारे राज़ पोशीदा हो जाएंगे।

अल-हलीम (बड़ा बर्दबार)

इस इस्म को कागज़ पर लिखकर पानी से धोकर पानी जिस चीज़ पर भी छिदका जाएगा खैर-ओ-बरकत होगी।

अल-अज़ीम (बहुत ही बुजुर्ग)

इस इस्म के बकसरत विरद करने वाले को इनशा अल्लाह ताला इज्ज़त व अजमत हासिल होगी।

अल-गफूर (बख्शने वाला)

जो शख्स या घफ़ूर का विरद बकसरत करेगा अल्लाह ताला उसके माल व औलाद में बरकत देगा और दुख तकलीफ व रंज-ओ-गम दूर हो जाएंगे।

आस-शकूर (सबसे बड़ा कदरदान)

माशी तंगी या दुख तकलीफ में मुब्तला शख्स अगर रोजाना 41 मर्तबा इस इस्म को पढे इनशा  अल्लाह ताला उससे निजात पाएगा।

अल-अली (बहुत बड़ा व बुलंद)

जो शख्स इस इस्म को हमेशा पढ़ता रहे और इसे लिखकर अपने पास रखे तो इनशा अल्लाह ताला रुतबा की बुलंदी और खुशहाली और मक़सद में कामयाबी हासिल होगी।

अल-कबीर (बहुत बड़ा)

ओहदे से माजूल शख्स 7 रोज़े रखे और रोजाना 1000 मर्तबा या कबीरों पढे, इनशा अल्लाह ताला ओहदे पर बहाल होगा।

अल-हफ़ीज़ (सबका निगहबान)

इस इस्म का विरद करने वाला और इसको लिखकर अपने पास रखने इनशा अल्लाह ताला हर खतरे और ज़र से महफूज रहेगा।

अल-मुकीत (तवानाई बख्शने वाला)

हुसूले मक़सद के लिए खाली आब खूरे पर सात मर्तबा या मुकीतो पढ़कर दम करे और फ़िर उस आब खूरे में पानी पिये इनशा अल्लाह ताला मक़सद हासिल होगा।   

अल हसीबो (सबके लिए काफी)

अगर किसी आदमी या चीज़ का दर हो तो जुमेरात से शुरू करके 8 रोज़ तक हस्बियल्लाहुल हसीब पढ़े , इनशा अल्लाह ताला हर शर से महफूज रहेगा।

अल-जलील (बुलंद मर्तबा)

मुस्क व ज़ाफ़रान से या जलीलो लिखकर अपने रखे और ब कसरत या जलीलो का विरद रखे तो इनशा अल्लाह ताला इज्ज़त, अजमत, क़द्र व मुंज़िलत हासिल होगी।

अल-करीम (बहुत करम करने वाला)

रोजाना ये इस्म पढ़कर सो जाया करे तो इनशा अल्लाह ताला उलमा, सुलहा में इज्ज़त नसीब होगी।

अर-रकीबो (बड़ा निगहबान)

जो शख्श रोजाना सात मर्तबा या रकीबो पढ़कर अपने माल, आल और औलाद पर दम करे और बकसरत इसका विरद करे इनशा अल्लाह ताला वह सब आफतों से महफूज रहेगा।

अल-मुजीबो (दुआ कुबूल करने वाला)

जो शख्श बकसरत इस इस्म का विरद करेगा तो इनशा अल्लाह ताला उसकी सब दुआएं बारगाहे खुदाबंदी में कुबूल होंगी।

अल-वासियो (गुंजाइश वाला)

अल्लाह ताला इस इस्म को बकसरत पढ़ने वाले के लिए गिनाए ज़ाहिरी व बातिनी के दर कुशदा फर्माएंगे।

एएल-हकीम ( हर शय की हकीकत जानने वाला)

जो शख्श बकसरत या हकीमो पढ़ा करेगा इनशा अल्लाह ताला उसके लिए इल्म व हिकमत के सारे दरवाजे खुल जाएंगे।

कोई काम अटका हुआ हो तो इस इस्म को पाबंदी से रोजाना पढ़ने से काम पूरा हो जाएगा।

  अल-वदूद (बड़ा मोहब्बत करने वाला)

एक हज़ार मर्तबा ये इस्म पढ़कर खाने पर दम करे और अपनी बीवी के साथ वो खाना खाये तो इनशा अल्लाह ताला मियाँ बीवी के दरमियान बाहमी रंजिश मुहब्बत में बादल जाएगी।

अल-मजीद (बहुत बुजुर्ग)

अगर कोई शख्श किसी मावज़ी मरज़े जुज़ाम , आतिश्क में मुब्तला हो तो चाँद की 13, 14 और 15 तारीख का रोज़ा रखकर इफ़तार के बाद या मजीद बकसरत पढ़कर पान पर दम करके पी ले तो इनशा अल्लाह ताला सेहत याब होगा।

अल-बायिसो (मुर्दे जिलाने वाला)

रोजाना रात को सोते वक़्त सिने पर हाथ रखकर 101 मर्तबा या बायिसो पढ़ने से इनशा अल्लाह ताला दिल इल्म और हिकमत से भर जाएगा।

अस-शहीदो (हाज़िर व नाज़िर)     

नाफरमान बीवी या पेशानी पर हाथ रखकर सुबह के वक़्त 21 मर्तबा या शहीदो पढ़ कर डैम किया जाये इंशा अल्लाह वो फरमानबरदार हो जायेंगे।

अल हक़ (बरहक़)

चौकोर कागज़ के चारो कोनों पर अल हक़ लिखें, फिर सहर के वक़्त कागज़ हथेली पर रखकर आसमान की तरफ बुलंद करें और दुआ करे तो इंशा अल्लाह गुमशुदा शख्स या सामन महफूज़ मिल जायेगा।

अल वकील (बड़ा कारसाज़)

किसी भी आसमानी आफत की खौफ के वक़्त या वकीलो का बकसरत विरद हर आफत से महफूज़ रखेगा।

अल क़वी (क़ुव्वत का सरचश्मा/ज़रिया)

जो शख्स वाकई मज़लूम, कमजोर या मग़लूब वह ज़ालिम दुश्मन की क़ुव्वत तोड़ने की नियत से बकसरत इस इस्म को पढ़े इंशा अल्लाह उससे महफूज़ रहेगा। (नाहक़ ये अमल हरगिज़ न करें)

अल मतीन (शदीद क़ुव्वत वाला)

अल-मतीन कागज़ पर लिख कर पानी से धोकर बे दूध वाली औरत को पिलायें। इंशा अल्लाह दूध बढ़ जायेगा।

अल-वली (हिमायती, दोस्त)

जो शख्स अपने अहले खाना के आदात व खसायिल से खुश न हो, वह जब उसके सामने जाये तो ये इस्म पढता रहे, इंशा अल्लाह, नेक खसलत हो जाएगी।

अल हमीद (तारीफ के लायक)

45 दिन मुतवातिर तन्हाई में 93 मर्तबा रोज़ाना या हमीदो पढ़ने वाले की बुरी आदत इंशा अल्लाह छूट जाएगी।

अल-मुहसी (दायरे शुमार में घेरे रखने वाला)

रोटी के 20 टुकड़ों पर रोज़ाना 20 मर्तबा ये आईएसएम लिख कर अगर कोई शख्स खाये तो इंशा अल्लाह, मखलूके खुदा उससे मुसख्खर होगी।

अल-मुब्दी (पहली बार पैदा करने वाला)

हामला के पेट पर हाथ रखकर 99 मर्तबा या मुब्दियो अगर पढ़ा जाये तो इंशा अल्लाह ताला वो हमल साक़ित होगए और न ही वक़्त से पहले बच्चा पैदा होगा।

अल-मुईद (दोबारा पैदा करने वाला)

गुमशुदा के लिए जब घर के सब अफ़राद सो जाएँ तो घर के चारो कोनों में सत्तर-सत्तर मर्तबा या मुईदो पढ़ें इंशा अल्लाह ताला गुमशुदा 7 रोज़ में आ जायेगा या पता चल जायेगा।

अल-मुहि (ज़िंदा रखने वाला)

बीमार शख्स अगर या मुहिओ का बकसरत विरद करे तो इंशा अल्ला टाला सेहतयाब हो जायेगा

और जो कोई शख्स 89 मर्तबा पढ़कर अपने ऊपर दम करे तो हर तरह की क़ैद व बंदिश से बचा रहेगा।

अल-मुमीत (मौत देने वाला)

जिस शख्स का नफ़्स अपने काबू में न रहे वह सोते वक़्त अल-मुमीतो पढता पढता सो जाये (सीने पर हाथ रखकर पढ़े) इंशा अल्लाह ताला नफ़्स काबू में हो जाएगी।

अल-हई (दायम ज़िंदा रहने वाला)

जो शख्स रोज़ाना ३ हज़ार मर्तबा या हइयो का विरद रखे इंशा अल्लाह ताला कभी बीमार न होगा।

जो बीमार मुश्क़ या गुलाब से चीनी बर्तन पर ये इस्म लिखकर मीठे पानी से धोकर पी ले तो शिफा पायेगा।

अल-क़य्यूम (सबको थामने वाला)

इस इस्म का बकसरत विरद करने से उस शख्स की लोगो में इज़्ज़त व साख बढ़ेगी।

तन्हाई में इसका विर्द करने वाला खुशहाल हो जायेगा।

अल-वाजिद (हर चीज़ पालने वाला)

खाने के वक़्त इस आईएसएम के विर्द से ग़िज़ा क़ल्ब की ताक़त व क़ुव्वत व नूर अनिययत का बाइश होगी।

अल-माजिद (बुज़ुर्गी और बड़ाई वाला)

तन्हाई में ये इस्म इस क़दर पढ़ा जाये बे खुद हो जाये तो इंशा अल्लाह ताला क़ल्ब पर अनवारे इलाहिया ज़ाहिर होगी।

अल-वाहिद अल-अहद (एक यकता)

एक हज़ार मर्तबा रोज़ाना अल-वाहिदुल अहद पढ़ने से पढ़ने वाले के दिल से मखलूक की मुहब्बत व खौफ निकल जायेगा।

बे औलाद इस आईएसएम को लिख कर अपने पास राक्ले तो इंशा अल्लाह ताला साहिबे औलाद हो जायेगा।

अस-समद (बे नियाज़)

सहर के वक़्त सर बसज्दा हो कर 125 मर्तबा ये इस्म पढ़ने से इंशा अल्लाह ताला ज़ाहिरी व बातिनी सच्चाई नसीब होगी।

अल-क़ादिर (गिरफ्त वाला, क़ुदरत वाला)

बरसरे हक़ शख्स दो रकत नफल पढ़ने के बाद सच्चे दिल से १०० मर्तबा या क़ादिरों पढ़े तो अल्लाह ताला उसके दुश्मनों को ज़लील व रुस्वा करेंगे।

कोई दुश्वारी पेश आ जाये तो 41 मर्तबा या क़ादिरों पढ़ने से इंशा अल्लाह ताला दूर हो जाएगी।

अल-मुक़्तदिर (पूरी क़ुदरत वाला)

सोकर उठने पर बकसरत या 20 मर्तबा या मुक़्तदिर पढ़ने से तमाम काम आसान होंगे।

अल-मुक़द्दिम (आगे बढ़ाने वाला)

हंगामे जंग या मुक़द्दिमो बकसरत विरद करने से इंशा अल्लाह ताला पेश कदमी की क़ुव्वत हासिल होगी और दशमनों से हिफाज़त होगी।

अल-मुअख्खिर (पीछे हटाने वाला)

जो शख्स 100 मर्तबा रोज़ाना पाबन्दी से या मुअख्खिरो का विरद करे उसे अल्लाह ताला का ऐसा क़ुर्ब हासिल होगा कि बिना उसके बेचैन रहे.

बकसरत विरद करने से इंशा अल्लाह ताला सच्ची तौबा की तौफीक नसीब होगी।

अल-अव्वल (पहला)

जिस के यहाँ औलादे नरैना न होती हो व 40 रोज़ रोज़ाना 40 मर्तबा या अव्वलो पढ़े इंशा अल्लाह ताला मुराद पूरी होगी।

अल-आख़िर (सबके बाद)

रोज़ाना 1000 मर्तबा ये इस्म पढ़ने से पढ़ने वाले के दिल से गैरुल्लाह की मोहब्बत निकल जाएगी। और इंशा अल्लाह ताला खत्म बखैर होगा।

अज़-ज़ाहिर (आश्कार)

नमाज़े िश्रक के बाद अगर कोई शख्स ये इस्म 500 मर्तबा विरद रखे तो इंशा अल्लाह, अल्लाह ताला उसके आँखों में रौशनी और और दिल में नूर अत फरमाएंगे।

अल-बातिन (पोशीदा)

रोज़ाना 33 मर्तबा या बातिनो का विरद करने से बातिनी असरार मनकशफ होने लगते हैं। और पढ़ने वाले के दिल में मोहब्बते इलाही पैदा होने लगती है।

अल-वाली (बा इक़्तेदार मुतसर्रिफ़)

इस इस्म का बकसरत विरद आफ़ते नागेहानी से बचता है।

कोरे आबखोरे पर लिख कर और उसमें पानी भर कर घर में छिड़कने से मकान भी आफत से महफूज़ होगा।

अल-मुत-आली (सबसे बुलंद व बरतर)

इस इस्म का बकसरत विरद रखने से इंशा अल्लाह सब मुश्किलात रफ़ा होंगी।

औरत अगर अय्यामे माहवारी बकसरत या मुत-आली का विरद रखे तो इंशा अल्लाह ताला तकलीफ से मह्फूज़ रहेगी।

अल-बर्र (बेहतरीन सुलूक करने वाला)

अगर कोई शराबी रोज़ाना 7 मर्तबा पाबन्दी से ये इस्म पढ़े तो इंशा अल्लाह गुनाह और शराब की रग़बत से दूर रहेगा।

बच्चे की पैदाइश पर 7 मर्तबा या बर्र पढ़ कर दम करके उसे अल्लाह के सुपुर्द करने से बच्चा जवानी तक हर आफ़ात से महफूज़ रहेगा।

अत-तव्वाब (बहुत जल्द तौबा क़ुबूल करने वाला)

नमाज़े चाशत के बाद 360 मर्तबा या तव्वाबो का विरद रखने वाले को इंशा अल्लाह ताला सच्ची तौबा नसीब होगी।

इस इस्म के बकसरत विरद करने से तमाम काम आसान हो जाएंगे।

अल-मुन्तक़िम (बदला लेने की क़ुदरत रखने वाला)

बरसरे हक़ शख्स में अपने दुश्मन से बदला लेने की क़ुव्वत न हो तो 3 जुमा तक या मुन्तक़िमो का बकसरत विरद करे अल्लाह ताला खुद उस ज़ालिम से निपट लेंगे /

अल-अफ़ुवु (बहुत दरगुज़र करने वाला)

इस इस्म को कसरत से पढ़ने वाले के इंशा अल्लाह सारे गुनाह माफ़ हो जायेंगे।

अर-रऊफ़ (मुश्फ़िक़ व मेहरबान)

बकसरत या रऊफ़ु का विरद करने से इंशा अल्लाह ताला मखलूक उसपर मेहरबान हो जाएगी और वो मखलूक पर।

10 मर्तबा या रऊफ़ु और 10 मर्तबा दरूद शरीफ पढ़ने से गुस्सा रफा हो जाता है।

मालिकुल मुल्क (क़ायनात का मालिक)

जो शख्स हमेशा या मालिकुल मुल्क का विरद करता रहेगा अल्लाह ताला उसे गनी और लोगों से बे नियाज़ कर देंगे। वह शख्स किसी का मोहताज़ न रहेगा।

ज़ुल-जलाल वल-इकराम (जलाल और करम वाला)

इस इस्म का बकसरत विरद करने से अल्लाह ताला उसको इज़्ज़त व अज़मत से और मखलूक से इस्तिग़ना नसीब फार्मा देंगे।

अल-मुक्सित (आदिल व मुन्सिफ)

किसी खास और जायज़ मकसद के लिया ये इस्म 700 मर्तबा पढ़ने से इंशा अल्लाह वो मक़सद हासिल होगा।

जो शख्स या मुक्सिटो का विरद रोज़ाना करे वो शैतानी वसवसों से महफूज़ रहेगा।

अल-जामेअ (यकजा करने वाला)

जिसके अइज़्ज़ा व अहबाब मुन्तशिर हो गए हो चाशत के वक़्त ग़ुस्ल करके मुंह आसमान की तरफ उठा कर 10 मर्तबा या जामेअ पढ़े और एक ऊँगली बंद करले और इसी तरह हर दस मर्तबा पर एक एक ऊँगली बंद करता जाये आखिर में दोनों हाथ मुंह पर फेर ले, इंशा अल्लाह ताला सब इकठ्ठा हो जायेंगे।

अगर कोई चीज गम हो जाये तो अल्लाहुम्मा जामे-अन्नास लि-यामिलला रैबा फ़ीहि इज्म-अ ज़ाललति पढ़ा करे इंशा अल्लाह ताला वो चीज़ मिल जाएगी।

अल-गनी (बे नियाज़)

रोज़ाना सत्तर मर्तबा इस इस्म को पढ़ने वाले के माल में अल्लाह ताला बरकत अता फरमाएंगे। इंशा अल्लाह ताला वो किसी का मोहताज़ नहीं होगा।

अल-मुग़नी (बेनियाज़गार)

अव्वल और आखिर 11 मर्तबा दरूद शरीफ और 1111 मर्तबा ये इस्म बतौर वज़ीफ़ा सुबह या ईशा की के बाद पढ़ने वाले को अल्लाह ताला गनाये ज़ाहिरी और बातिनी आता फरमाएंगे।

अल-मानिओ (रोक देने की ताकत रखने वाला)

मियां बीवी में न इत्तेफ़ाक़ी हो तो बिस्तर में लेटते वक़्त २० मर्तबा ये आईएसएम पढ़ लिया करें इंशा अल्लाह बेपनाह मोहब्बत हो जाएगी।

या मानिओ बकसरत पढ़ने वाला शर से महफूज़ रहेगा

अद-दार (नुकसान पहुँचाने की कुदरत रखने वाला)

शबे जुमा में 100 ये इस्म पढ़ने वाला इंशा अल्लाह ताला हर ज़ाहिरी और बातिनी आफतों से महफूज़ रहेगा और उसे क़ुर्बे इलाही हासिल होगा।

अन-नाफ़ि (नफ़ा पहुँचाने की क़ुदरत रखने वाला)

कोई भी काम शुरू करने से पहले 41 मर्तबा या नाफ़िओ पढ़ने से इंशा अल्लाह ताला काम हस्बे मंशा होगा।

किसी सवारी का सवार इस इस्म का बकसरत विरद करे तो हर आफत से बचा रहेगा।

अन-नूर (नूर सरापा)

जो शख्स शबे जुमा में 7 मर्तबा सूरह नूर और 1000 मर्तबा या नूर पढ़ेगा तो इंशा अल्लाह उस का दिल नूरे इलाही से मुनव्वर होगा।

अल-हादी (राहे रासित दिखने वाला)

हाथ उठाकर मुंह आसमान की तरफ करके जो शख्स इस इस्म को बकसरत पढ़कर हाथ मुंह पर फेर ले तो उस को इंशा अल्लाह ताला कामिल हिदायत हासिल होगी और अहले मार्फ़त भी शामिल होगी।

अल-बदीअ (नमूने के बगैर ईजाद करने वाला)

या बदीओ पढ़ते पढ़ते अगर सो जाये तो जिस काम का इरादा हो वह ख्वाब में मालूम हो जायेगा।

जिसको कोई मुसीबत या परेशानी आये तो वह 1000 मर्तबा या बदीउस समावाते वाल अर्द पढ़े तो इंशा अल्लाह टाला गम व परेशानी से निजात हासिल होगी।

जो शख्स नमाज़े ईशा के बाद 1200 मर्तबा १२ दिन तक या बदीअल अजायब बिल खैरे या बदीओ जिस मक़सद के लिए पढ़ेगा इंशा अल्लाह ताला वो मक़सद अमल की मुद्दत से पहले पूरा हो जायेगा।

अल-बाक़ी (हमेशा हमेशा रहने वाला)

जुमा की रात को 1000 मर्तबा जो शख्स इस इस्म का विरद करेगा तो अल्लाह उसे हर ज़रर और नुकसान से महफूज़ रखेंगे और इंशा अल्लाह ताला उसके तमाम नेक काम मक़बूल हो जायेंगे।

अल-वारिष (सबके बाद मौजूद रहने वाला)

तुलू आफताब के वक़्त जो शख्स 100 मर्तबा इस इस्म को पढ़ेगा हर क़िस्म के रंज व सख्ती से महफूज़ रहेगा

और जो शख्स मग़रिब व ईशा के दरमियान 1000 मर्तबा ये इस्म पढ़ेगा हर तरह की हैरानी व परेशानी से बचा रहेगा।

अर-रशीद (नेकी पसंद करने वाला)

रोज़ाना इस इसमे का 1000 मर्तबा विर्द करने से मुश्किलात दूर होंगी और कारोबार में तरक्की होगी।

और जिस शख्स को अपने किसी काम की तदबीर समझ में न आ रही हो वह मग़रिब और ईशा के दरमियान १००० मर्तबा या रशीदो पढ़े तो या तो ख्वाब में उसकी तदबीर मालूम हो जाएगी या दिल में कोई इलका हो जायेगा।

अस-सबूर (बर्दाश्त वाला)

तुलू आफताब से पहले अगर कोई शख्स इस आईएसएम को 100 मर्तबा पढ़े तो इंशा अल्लाह ताला उस हर मुसीबत से बचा रहेगा और दुश्मनों व हसीदों की ज़बानें बंद रहेंगी।

अगर कोई शख्स किसी मुसीबत में फंस गया है तो 1020 मर्तबा या शबूरो पढ़े तो उस से निजात पा जायेगा।

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