15 खूबियाँ जो अल्लाह को है पसंद। चौथी ज़रूर पढ़ें।

अस्सलाम अलयकुम! अल्लाह अपने सभी बंदों से बराबर मोहब्बत करता है। क्या बंदे भी अल्लाह से मोहब्बत करते हैं? अल्लाह अपने बंदों की कौन से खूबियों को पसंद करता है? अगर फेहरिस्त बनाऊँ तो लिस्ट बहुत लंबी हो जाएगी इसलिए यहाँ पेश हैं कुछ चुनिन्दा खूबियाँ जो अल्लाह को है पसंद। तो पूरी लिस्ट को पढ़िये और देखिये आपमें कौन कौन सी खूबी है।

तौबा

बेशक , अल्लाह मोहब्बत करता है तौबा करने वालों से और मोहब्बत करता है पाक रहने वालों से ।

सूरह बक़्रह आयत 222

अल्लाह अपने उन बंदों से मोहब्बत करता है जो हमेशा तौबा का रास्ता अपनाते हों और अपनी छोटी से छोटी गलती के लिए भी अल्लाह रब्बुल इज्ज़त बारगाह मे तौबा व अस्तगफार करें। अल्लाह उनसे मोहब्बत करता है जो जानते है कि अल्लाह बहुत मेहरबान है, रहमतवाला है।

वो जानते हैं सभी गुनाहों को बख्शने वाला सारी तौबायें कुबूल करने वाला सिर्फ अल्लाह है। ये सब जानते हुए वो अपने सभी गुनाहो सभी गलतियों कि तौबा करते रहते हैं। क्योंकि उन्हे पता है कि वो गुनाह करते करते थक जाएंगे मगर अल्लाह माफ करते नहीं थकेगा।

तो मेरे दोस्तों गलतियाँ किसी से भी हो सकती हैं मगर खुदा सिर्फ उसको पसंद करता है जो गलती करके तौबा करले। फिर गलती चाहे जितनी बार भी हो तौबा ज़रूर करना चाहिए।

ये तो बात हुई जब हमें पता चल जाए की हमसे गलती हुई, हमने गुनाह किया। क्या करें जब हमें पता न चले की हमसे कोई गुनाह हुआ है? तो ऐसे मे एक ही रास्ता है कि हम हमेशा तौबा मे मशगूल रहें अपने हरेक काम के बाद तौबा करें। इससे अल्लाह ताला आपसे राज़ी रहेंगे।

हमारे प्यारे आक़ा, अहमद मुजतबा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया है…

आदम के औलादों में सभी गुनाह करते हैं, मगर उनमे अफजल वो जो गुनाह करके तौबा करले ।

इब्ने माजा 4251 – हसन

पाकीज़गी या तहारत

ऊपर की आयत में हमने पढ़ी और उसका तर्जुमा भी पढ़ा और वहाँ से पाया की अल्लाह ताला पाक रहने वालों को भी पसंद करता है। यहाँ पर जिस्मानी तहारत की बात की गयी है।

तहारत हासिल कैसे करें?

इसका सबसे नायाब तरीका है और वो है अम्बियाय किराम अलैहि सलाम का तरीका। सारे नबियों ( अलैहि सलाम) ने तहारत के लिए जो तरीका अपनाया वो सबसे बेहतरीन तरीका है। आपको भी उसी तरीके की पैरवी करनी चाहिए।

क्या है वो तरीका?

  • वज़ू और ग़ुस्ल के जरिये अपनी गंदगी को निकालना।
  • अपनी पोशाक से गंदगी निकालना यानि कपड़ों को धोकर साफ और सुथरा रखना।
  • अपने रहने की जगह को पाक रखना
  • अपनी इबादत की जगह को पाक रखना।
  • आपके शरीर को पाक रखना।

अल्लाह अपने हर उस बंदे से मोहब्बत करता है जो अपने आप को हर तरह की नापाकी से दूर रखता है। फिर चाहे वो कबीरा हो चाहे सगीरा। पाक रहने की फेहरिस्त में शिर्क और गुनाहों से पाकी को भी शामिल किया गया है।

मेहरबानी

अल्लाह से बड़ा मेहरबान दुनिया मे कोई नहीं है। ऐसा कहना अल्लाह की शान मे गुस्ताखी भी हो सकती है क्योंकि अल्लाह सारे औसाफ़ों का जरिया है सारी खूबियों का जामेय है। ऐसे मे कोई बूंद किसी समंदर से बड़ी कैसे हो सकती है।

दुनियाँ के सारे इन्सानों ने अल्लाह की उस बेपनाह मेहरबानी मे से कतरा भर पाया है। उस कतरे मे से जो भी इंसान मेहरबानी का जज़्बा किसी दूसरे इंसान के लिए या किसी दूसरी मख़लूक़ के लिए के लिए करे अल्लाह रब्बुल इज्ज़त उस इंसान से बहुत मोहब्बत करता है।

इरशादे नबी अकरम सल्लल्लाहो ताला अलैहि है…

उम्मुल मोमीनीन हज़रत आएशा सिद्दीका रज़ी० से रिवायत है , हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि,” अल्लाह मेहरबान है और वो मेहरबानी पसंद करता है और इस पर एतमाद करता है।अल्लाह जिस सिद्दत से मेहरबानी पसंद करता है उतना किसी और चीज पर एतमाद नहीं करता। “

सही मुस्लिम 2593

तकवा

इन्नल्लाह युहिब्बूल मुत्तकीन
सूरह तौबा आयत 4

बेशक, अल्लाह मुत्तकी लोगों से मोहब्बत करता है ।

सूरह तौबा आयत 4

अल्लाह का डर एक पाक रूह का जरिया है। ये शफकत और अदब से पैदा होती है। यही वजह है कि एक तकवाकर आदमी हमेशा अच्छाई कि तरफ ही मुतवज्जोह रहता है।

तकवा एक रूहानी मेययार है जैसा कि अल्लाह के नबी ने अपनी उंगली से तीन बार अपने सीने की तरफ इशारा करते हुए फरमाया है,

तकवा यहाँ है।

सही मुस्लिम, किताब 032, हदीस 6219

तकवा वो खूबी या मेययार है जो हमें अल्लाह कि बारगाह में दूसरों से ऊपर करता है।

एक मुत्तकी मोमिन बहुत ज़हीन और आजिज़ होता है और वो अपनी तक्वाकारी का दिखावा नहीं करता बल्कि वो हक़ीक़ी तौर पर तक्वाकार होता है।

अल्लाह का डर इंसान के ईमान को मजबूत और पुख्ता करता है। और ये सारी अच्छाइयों कि जड़ है कि एक इंसान सिर्फ उसी काम को करना चाहता है जिसे अल्लाह पसंद करे और हर उस काम को छोड़ दे जिसे अल्लाह पसंद नहीं करता।

कहीं कहीं पर तकवा को इस तरह भी दिखाया गया है कि ये किसी इंसान को जहन्नम कि आग से बचाने का एक तरीका का इसके लिए उस इंसान को वो काम करने होंगे जिसकी इजाज़त अल्लाह ने दी है बाकी सारी चीजें जिसे अल्लाह ने माना किया है छोडना होगा।

सब्र

इन्नल्लाह मा साबिरीन
सूरह बक़्रह आयत 153

ऐ ईमान वालों सब्र और नमाज़ से मदद मांगो, बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है

सूरह बक़्रह आयत 153

सब्र किसी इंसान की सभी उम्दा खूबियों मे से एक है। ये वो खूबी जो हमें कोई चीज़ पसंद न होने के बावजूद सिर्फ अल्लाह की रजामंदी और जज़ा के लिए बर्दाश्त करना सिखाती है।

सब्र की तीन मिसलें हैं।

  1. बुरे वक़्त मे सब्र– ये सब्र की वो मिस्ल है जब कोई इंसान किसी भी तरह की कोई शिकायत न करे और न ही अपने हालत से ग़मज़दा हो। इसके बजाए वो अल्लाह की रजामंदी के लिए खुद को अल्लाह की राह में खुद को न्योछावर करदे और अपनी सारी मुसीबतों को बर्दाश्त करता रहे और अपने सब्र का इम्तिहान देता रहे। जैसे अय्युब अलैहि सलाम को सेहत, दौलत, शोहरत, और बेशुमार तोहफे दिये गए और फिर उनसे ले लिए गए। या, जैसे याक़ूब अलैहि सलाम जिनसे उनके दो महबूब बेटे दूर कर दिये गए।
  2. अल्लाह के फरमान को अमल मे लाने का सब्र इस तरह के सब्र हैं जैसे, नमाज़ क़ायम करना, रमज़ान के रोज़े रखना(खासकर जब दिन बड़े हों), ज़कात देने मे सब्र, हज करने मे सब्र वग़ैरा।
  3. अल्लाह ने जओ माना किया है उससे बचने का सब्र जैसे, सूदखोरी, जुआ, जीना, खिंजीर का गोश्त, शराब और दूसरे हराम काम।

नेक आमाल

सूरह आले इमरान आयत 134
सूरह आले इमरान आयत 134

वह जो अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, खुशी में और रंज में और गुस्सा पीने वाले और लोगों से दरगुजर करने वाले और नेक लोग अल्लाह के महबूब हैं।

सूरह आले इमरान आयत 134

एहसान किसी इंसान की बहुत ही आलतरीन वस्फ़ है। ये इस्लाम का बहुत ही अहम हिस्सा है। खुश मिजाज़ी, दरियादिली और नेकी का एक ही राज़ है कि ये बात जानना अल्लाह सबकुछ देख रहा है। ये दिल को इज्ज़त और वकार से इस क़दर भर देता है की इंसान को फिर अल्लाह की हुक्म खिलाफ़ी करने मे शर्म महसूस हो।

एहसान अल्लाह की राह पर (अल्लाह की रज़ा के लिए) किए गए नेक कामों को बढ़ावा देता है न कि दिखावे को और तारफेन बटोरने को और शोहरत पाने को।

जैसा कि पूरी आयात को अच्छे से पढ़ने पर हम पाएंगे…

वह जो अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, खुशी में और रंज में और गुस्सा पीने वाले और लोगों से दरगुजर करने वाले और नेक लोग अल्लाह के महबूब हैं।

इस आयत में 4 ऐसे नेक काम कहे गए हैं जिसे कोई इंसान कर सकता है…

  1. अल्लाह कि राह में खर्च करना जब खुशहाल वक़्त हो
  2. अल्लाह कि राह मे खर्च करना जब ग़म के दिन त तंगी हो
  3. गुस्से को क़ाबू मे रखना जैसा कि हुज़ूर पुरनूर ने इरशाद फ़रमाया है, ” गुस्से पर क़ाबू रखो और जन्नत तुम्हारी होगी” (तबरानी)
  4. किसी की गलती और ऐब के बावजूद उसे माफ करना।

तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा)

सूरह आले इमरान आयत 159
सूरह आले इमरान आयत 159

जब किसी काम को पक्का करो तो अल्लाह पर भरोसा रखो, बेशक, अल्लाह भरोसा रखने वालों को प्यार करता है।

सूरह आले इमरान आयत 159

अल्लाह पर तवक्कुल का राज़ और हक़ीक़त यही है कि सिर्फ और सिर्फ अल्लाह पर भरोसा किया जाए क्योंकि सिर्फ वही भरोसे के काबिल है।

आखिर तवक़्क़ा है क्या?

किसी काम को करना और उसके नतीजे को अल्लाह पर छोड़ देना कि तवक़्क़ा कहलाता है।

ध्यान रहे यहाँ पर काम से मुराद जायज़ कामों से है जिसकी कोई मनाही नहीं है नाजायज कामों का बदला भी अल्लाह ही देता है मगर हम यहाँ पर उस तरह के कामों का ज़िक्र नहीं करेंगे। इंसान को अपने कामों अपनी कुव्वत के हिसाब से पूरी ईमानदारी से करे और अल्लाह पर यकीन रखे कि सारे कामों का नतीजा बताने वाला अल्लाह ही है वह चाहे तो कामयाब करे या फिर नाकाम।

अल्लाह के लिए एक दूसरे से शफकत

आबु हुरैरा रज़ी० से रिवायत है कि शहंशाहे मदीना हज़रत मुहम्मद मुश्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम का फ़रमाने आलीशान है…

कयामत के दिन अल्लाह पुछेगा, “कहाँ गए वो लोग जो मेरी शान के लिए एक दूसरे से प्यार किया करते थे? आज जब उनके सिर पर मेरे अलावा कोई और छांव नहीं है तो मैं खुद छांव बनकर उनको साया दूंगा .

सही मुस्लिम (2566)

अल्लाह के रसूल ने फिर इरशाद फ़रमाया,

तुम तब तक जन्नत मे दाखिल नहीं होगे जबतक तुममे ईमान नहीं होगा और तुममे ईमान ताबतक नहीं होगा जबतक तुम एक दूसरे से प्यार नहीं करोगे। क्या मैं तुम्हें कुछ ऐसा बताऊँ जिसे करके तुम एक दूसरे से प्यार करने लगोगे? अपने बीच सलाम को फैलाओ।

सही मुस्लिम (54)

आदिल

सूरह हुजूरात आयत 9
सूरह हुजूरात आयत 9

और अगर मुसलमानों के दो गिरोह आपस में लडें तो उनमें सुलह कराओ फिर एक दूसरे पर ज़्यादती करे तो उस ज़्यादती वाले से तब तक लड़ो कि वो अल्लाह के हुक्म की तरफ पलट आए। और फिर जब पलट आए तो इंसाफ के साथ उनमें इसलाह कर दो और अद्ल करो। बेशक अद्ल वाले अल्लाह को प्यारे हैं।

सूरह हुजूरात आयत 9

अमन के लिए अद्ल पहली शर्त है जिसकी हमारे माशरे से लगभग खत्म सा हो गया है। अद्ल का मतलब हम कह सकते हैं अपने बोलचाल और अमल मे एक जैसा होना। अद्ल मे किसी तरह का भेदभाव न और न ही कोई गलत बयानी हो।

ईमान की मजबूती

इर्शादे सय्यदुल मुरसलीन सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम है,

एक मजबूत मोमिन एक कमजोर मोमिन के मुक़ाबले अल्लाह को ज़्यादा प्यारा होता है। हर चीज में कुछ न कुछ अच्छाई होती है और तुम उसी चीज को पसंद करो जो तुम्हें फायेदा दे और दिल को मायूस किए बगैर अल्लाह पर भरोसा रखो। कोई भी मुसीबत तुम पर आए तो ये मत कहो, अगर मैंने ऐसा नहीं किया होता तो ऐसा नहीं होता या वैसा नहीं होता। बल्कि कहो, अल्लाह ने जैसा चाहा वैसा किया क्योंकि ज़्यादा अगर मगर शैतान का दरवाजा खोल देता है।

सही मुस्लिम (2664)

नेकी पर अमल

रसूले आजम अहमद मुजतबा मुहम्मद मुश्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वासल्लम से एक सहाबी ने पूछा,

अल्लाह के नजदीक सबसे महबूब अमल क्या है?

आप सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया , मुतवातिर नेक काम करते रहना अल्लाह को सबसे ज़्यादा पसंद है चाहे वो थोड़े ही या छोटे ही क्यों न हो। और हाँ इस बात पर भी ध्यान दें की नेकी को कभी बोझ की तरह न लें नेकी वही करें जो आपके हद मे हो या जिसे आप कर सको ।

सही अल बुखारी (6465)

अच्छे अखलाक

हुज़ूर पुर नूर सरवरे कायनात मुहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,

बेशक, कयामत के दिन मुझे सबसे प्यारा और मेरे सबसे नज़दीक तुममे से वो होगा बेहतरीन किरदार वाला होगा। बेशक, क़यामत के दिन मेरे खेमे मे तुममे सबसे ज़्यादा मज़म्मत वाला और मुझसे सबसे दूर वो होगा जो घमंडी, फिजूल खर्च वाला और झूठी शान दिखाने वाला होगा।

सहाबियों ने पूछा, ” आक़ा, हम घमंडियों को जानते हैं और ये भी जानते हैं कि फिजूल खर्ची वाले कौन होते हैं। पर ये झूठी शान वाले कौन से लोग होंगे?” आप सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने कहा, “तकब्बुर वाले लोग।” (तिरमिज़ी, 2018)

सखावत

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम का फरमान है,

अल्लाह बहुत बड़ा सखी है और वो सखावत और बुलंद किरदार वालों को पसंद फरमाता है। और तंगदिली को नापसंद फरमाता है।

सुनन अल कुबरा 19134 – सही अल-अलबानी

दुआ

अल्लाह ताला को पसंद है कि कोई उससे कुछ मांगे। और अल्लाह हर किसी की हौसला अफजाई करता है मांगने के लिए। वह उनसे नाराज़ भी हो जाता है जो उससे नहीं मांगते। अल्लाह अपने बंदों को मांगने के लिए उकसाता रहता है। अल्लाह फरमाता है,

सूरह मोमिन आयात 60
सूरह मोमिन आयत 60

और तुम्हारे रब ने फ़रमाया मुझसे दुआ करो मैं कुबूल करूंगा , बेशक, वह जो मेरी इबादत से ऊंचे खिंचते है अनकरीब जहन्नम में जाएंगे जलील होकर।

सूरह मोमिन आयत 60

दुआ का इस्लाम में बहुत ही अहम किरदार है। इतना अहम कि हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया,

दुआ इबादत है।

तिरमिज़ी 3372, अबु दाऊद 1479, इब्ने माजा 3828

खुद्दारी

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,

अल्लाह अपने उन बंदों को पसंद फरमाता है जो इतने खुद्दार होते हैं कि गरीब होने के बावजूद भी चाहे उनके कई बच्चे ही क्यूँ न हों भीख मांगने से परहेज करते हैं।

रियाद अस-सालीहीन 757 – मुस्लिम

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