सूरह अल फ़ातिहा – तार्रुफ और उसके 15 नामे मुबारक

बिरदराने इस्लाम अस्सलाम व अलइकूम। सूरह अल फ़ातिहा क़ुरान शरीफ की बहुत ही अज़ीम तरीन सूरह है. इस सूरह के बहुत से फ़ज़ाइल हैं । और आज हम उन्ही फ़ज़ीलतों की और इस सूरह के 15 नामे मुबारक के बारे में जानेंगे । और ये जानेंगे की इस सूरह के ये 15 नाम क्यूँ पड़े?

मकामे नुजूल – सूरह अल फ़ातिहा कहा नाज़िल हुई

सूरह अल फ़ातिहा का मकामे नुजूल वुल्माए दीन के लिए अक्सर चर्चा की वजह रहा है । क्योंकि कुछ वुलमा मानते हैं कि सूरह अल फ़ातिहा मक्का मुक़र्रमा में नाज़िल हुई।और दीगर वुलमा मानते हैं कि सूरह अल फ़ातिहा मदीना मुनव्वरा में नाज़िल हुई।

इमाम मुजाहिद रहमत उल्लाह ताला अलइह मानते हैं कि सूरह अल फ़ातिहा मदीना मुनव्वरा में नाज़िल हुई । और एक क़ौल ये भी है कि सूरह अल फ़ातिहा दो बार नाज़िल हुई है । एक बार मक्का मुक़र्रमा में और एक मर्तबा मदीना मुनव्वरा में।

रुकू और आयात कि तादाद  

सूरह अल फ़ातिहा में कुल मिला कर 1 रुकू और 7 आयतें हैं।

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सूरह अल फ़ातिहा के नामे मुबारक और उनके रखे जाने कि वजह

इस सूरह के कई नाम हैं । और ज्यादा नाम होना इसकी फ़ज़ीलत और शरफ कि दलील पेश करता है । इस सूरह के कुल 15 मशहूर नाम हैं ।

  1. फ़ातिहातुल किताब
  2. सूरतुल हम्म्द
  3. उम्मुल क़ुरान
  4. उम्मुल किताब
  5. अस्सब उल मसानी
  6. सूरह कंज
  7. सूरतुल वाफ़िया
  8. सूरतुल काफ़िया
  9. सूरतुस शिफ़ा
  10. सूरतुल शाफ़िया
  11. सूरतुद दुआ
  12. सूरतुल तालीमूल मस-अला
  13. सूरतुस सुवाल
  14. सूरतुल मुनाजात
  15. सूरतुत तफ़्वीद

#1. फ़ातिहातुल किताब

क़ुरान पाक कि तिलावत सूरह अल फ़ातिहा से शुरू होती है इसी सूरह से क़ुरान पाक लिखने कि इब्तेदा कि जाती है इसलिए इसे फ़ातिहातुल किताब यानि किताब कि इब्तेदा करने वाली कहा जाता है ।   

#2. सूरतुल हम्म्द

इस सूरह कि शुरुआत अल्हम्दुलिल्लाह से होती है इसलिए इस मुनासिबत से इसको सूरतुल हम्म्द जिसमे अल्लाह त-आला कि हम्म्द बयान करने वाली कहा जाता है।

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#3 & #4. उम्मुल क़ुरान और उम्मुल किताब

सूरह अल फ़ातिहा क़ुरान शरीफ कि असल है इस बिना पर इस सूरह को उम्मुल क़ुरान और उम्मुल किताब कहते हैं ।

#5. अस्सब -उल- मसानी

ये सूरह नमाज़ कि हर रकात में पढ़ी जाती है या ये सूरह दो मर्तबा नाज़िल हुई इस वजह से इसे अस्सब – उल – मसानी यानी बार बार पढ़ी जाने वाली या एक से ज्यादा मर्तबा नाज़िल होने वाली 7 आयतें कहा जाता है ।

#6 to 8. सूरह कंज, सूरतुल वाफ़िया, सूरतुल काफ़िया

दीन कि बुनियादी उमूर का जामेय होने कि वजह से सूरह अल फ़ातिहा को सूरह कंज, सूरतुल वाफ़िया और सूरतुल काफ़िया कहा जाता है ।  

#9 & 10. सूरतुस शिफा, सूरतुल शाफ़िया

ये सूरह , शिफ़ा के बायेश होने कि वजह से इसे सूरतुस शिफ़ा और सूरतुल शाफ़िया भी कहते हैं ।

#11 to 15. सूरतुद दुआ, सूरतुल तालिमुल मास-अला, सूरतुल सुवाल, सूरतुल मुनाजात और सूरतुत तफ़्वीद

दुआ पर ख़त्म होने कि वजह से इस सूरह को  सूरतुद दुआ, सूरतुल तालिमुल मास-अला कहा जाता है।  सूरतुल सुवाल, सूरतुल मुनाजात और सूरतुत तफ़्वीद भी कहा जाता है ।

सूरह अल फ़ातिहा के फ़ज़ाइल

अहादीस में सूरह फ़ातिहा के बहुत से फ़ज़ाइल बयान किए गए हैं । इनमे से 4 फ़ज़ाइल नीचे पेश किए गए हैं ।

  1. हज़रत अबू सईद बिन मुअल्ला (रज़ी अल्लाहो ताला अनहा) फरमाते है, ” मैं नमाज़ पढ़ रहा था तो मुझे नबी करीम सल्लल्लाहो ताला अलइह वसल्लम ने बुलाया। लेकिन मैंने जवाब न दिया। जब नमाज़ से फारिग होकर बारगाहे रिसालत में हाज़िर हुआ तो मैंने अर्ज़ किया, या रसूल अल्लाह  सल्लल्लाहो अलइह वसल्लम मैं नमाज़ पढ़ रहा था । ताजदारे रिसालत सल्लल्लाहो ताला अलइह वसल्लम  ने इरशाद फरमाया “क्या अल्लाह ताला ने ये नहीं फरमाया, अल्लाह और उसके रसूल कि बारगाह में हाज़िर हो जाओ जब वो तुम्हें बुलाएँ । फिर इर्श्द फरमाया, क्या मैं तुम्हें तुम्हारे  मस्जिद से निकलने  से पहले क़ुरान कि सबसे अज़ीम सूरह न सिखाऊँ? जब हम मस्जिद से निकलने का इरादा किए तो अल्लाह के रसूल ने मेरा हाथ पकड़ लिया तो और इरशाद फरमाया वो सूरह “अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन” है, यही सब-ए-मसानी और क़ुरान मजीद है जो मुझे अता फरमायी गयी है । — (बुख़ारी, किताबे फजाईल क़ुरान , बाब फ़ातिहातुल क़ुरान, 3/404, हदीस 2005) 
  2. हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ी अल्लाहो ताला अनहा) फरमाते हैं, एक फरिश्ता आसमान से नाज़िल हुआ और उसने सय्यदुल मुरसलीन सल्लल्लाहो ताला अलइह वसल्लम कि बारगाह में सलाम पेश करके अर्ज़ किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलइह वसल्लमआपको उन दो नूरों कि बरसात जो आपके अलावा और किसी नबी को अता नहीं हुई । और वो दो नूर      हैं 1. सूरह अल फ़ातिहा 2. सूरह बकरा कि आखिरी आयतें । –(मुस्लिम, किताबे मुसाफिरिनों किसराहा, बाब फज़्लुल फ़ातिहा, 404, हदीस 254)
  3. हज़रत उबी बिन का-अब (राज़ी अल्लाहो त-आला अनहा) से रिवायत है, हुज़ूर पुरनूर सल्लाल्लाहो अलाइहि वासल्लम ने इरशाद फरमाया, अल्लाह त-आला ने तौरएत और इंजील में उम्मुल कुरान के जैसी कोई सूरह नजील नहीं फरमायी। –(तिरमिज़ी,किताबुत तफ़सीर, बाब व मिन सूरह (हिज्र), 5/87, हदीस 3136)
  4. हज़रत अब्दुल मालिक बिन उमइर (रज़ी अल्लाहो त-आला अनहा) से रिवायत है, नबी करीम सल्लाल्लाहो अलाइहि वासल्लम ने इरशाद फरमाया “सूरह फातिहा हर मर्ज के लिए शिफा है। — (सह-अबुल ईमान अल ताशू अशरा मिन श-अब, फस्ल फी फ़ज़ाइल-उल-सूर-ओ-आयात, 2/450, हदीस 2380)

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