कुल हुअ अल्लाहु अहद। सूरह इख़लास, तफसीर और तर्जुमा।

अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह। मेरे अजीज़ दोस्तों आज हम कुरान शरीफ कि बहुत ही अहम सूरह का ताज़करा किया है। कुरान शरीफ में इस सूरह कि बहुत अहमियत है। आम अल्फ़ाज़ में कहें तो इस सूरह में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपने बारे में फरमाया है। इस सूरह को हम कुल हुअ अल्लाहु अहद से शुरू करते हैं। और इस सूरह को सूरह इखलास के नाम से जाना जाता है।

तो बिना वक्त गंवाए चलिए हम सूरह इख़लास या कुल हुअ अल्लाहु अहद के बारे में जानते हैं।

इन्हें भी पढ़ें

सूरह इखलास का तार्रुफ।

मकामे नुजूल।

सूरह इखलास के नाज़िल होने के बारे में दो कौल है। एक कौल के मुताबिक सूरज इखलास मक्की है और दूसरी कौल के मुताबिक मदनी।

रुकू और आयात कि तादाद।

इस सूरह में 1 रूकू और 4 आयतें हैं।

सूरह इखलास के नाम और उनकी वजह।

मुफससरीन ने इस सूरह के तकरीबन 20 नाम ज़िक्र किए हैं। उनमें से 4 नाम पेशे खिदमत है।

  • इस सूरह में अल्लाह ताला कि खालिस तौहीद का बयान है इसलिए इस सूरह को सूरह इखलास के नाम से जाना जाता है।
  • इस सूरह में ये बताया गया है कि अल्लाह ताला हर नक्श व ऐब से बरी है और हर शरीक से पाक है इसलिए इस सूरह को सूरह तंजीहा कहते हैं।
  • जिसने इस सूरह से ताल्लुक रखा वो गैरों से अलग हो जाता है इसलिए इसे सूरह ताजरीदा कहते हैं।
  • इसे पढ़ने वाला जहन्नम से निजात पा जाता है इसलिए इसे सूरह निजात भी कहते हैं।

सूरह इखलास के फजाइल।

हदीस मे इस सूरह के बहुत से फज़ाइल बयान किए गए हैं। उनमें से तीन हदीस और एक वजीफा नीचे पेशे नजर है।

  1. हज़रत अबू सईद खुदरी रज़ी० से रिवायत है कि नबिए पाक हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि क्या तुम में से कोई इससे आजिज़ है कि रात में कुरान पाक का एक तिहाई हिस्सा पढ़ ले? सारे सहाबा को ये बात मुश्किल मालूम हुई और कहा या रसूल अल्लाह हम में से कौन इसकी ताकत रखता है? तो आप सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया, सूरह इखलास क़ुरान के एक तिहाई के बराबर है।
  2. हज़रत आएशा सिद्दीका रज़ी० फ़रमाती हैं, हुज़ूर पुर नूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम एक शख्स को एक लश्कर में रवाना किया। वह अपने साथियों को नमाज़ पढ़ाते तो सूरह फातिहा के साथ दूसरी सूरह मिलने के बाद सूरह इख़लास पढ़ते थे। जब लश्कर वापस आया तो लोगों ने नबी करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम से ये बात ज़िक्र की तो आप ने उनसे इरशाद फ़रमाया, उससे पूछो की तुम ऐसा क्यों करते हो? जब लोगों ने उस से पूछा तो उसने कहा, ये सूरह रहमान की सिफ़्फ़त है इस वजह से मैं इसे पढ़ना पसंद करते हैं। तजदारे रिसालत सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया, उसे बता दो की अल्लाह ताला उससे मोहब्बत फरमाता है।
  3. हज़रत अनस रज़ी० से रिवायत है एक शख्स ने सय्यदे आलम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम अर्ज़ की कि मुझे इस सूरह से बहुत मुहब्बत है। हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया इसकी मोहब्बत तुझे जन्नत में दाखिल कर देगी।
  4. तफ़सीर सावि में लिखा है कि जो शख्स घर में दाखिल होते वक़्त सलाम करे और घर खाली हो तो हुजूरे अक़्दस को सलाम करे और कुल हो अल्लाहो अहद पढे तो इनशा अल्लाह ताला फिक्र और फाका से महफूज रहेगा।

सूरह इख़लास का शाने नुजूल

इस सूरह का शाने नुजूल ये है कि कुफ़्फ़ार ने रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम से अल्लाह रबबूल इज्ज़त के मुताल्लिक तरह तरह के सवाल किए।

  • कोई कहता कि अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल का नसब क्या है?
  • कोई कहता था कि अल्लाह सोने का है या चांदी का, या फिर लोहे का है या लकड़ी का? वह किस चीज का बना है?
  • किसी ने कहा वह क्या खाता है? क्या पीता है?
  • उसने रबूबीयत किससे विरासत मे पायी है? और उसका वारिस कौन होगा?

इन सारे सवालात के जवाब में अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने ये सूरह नाज़िल फरमायी। इस सूरह के ज़रिये अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल ने अपनी ज़ात व शिफ़्फ़ात का बयान फ़रमा कर मारफ़त कि राह वाजेह की। जाहिलाना खयालात व औहाम की तारीकियों को जिन मे वह लोग गिरफ्तार थे अपनी ज़ात व शिफ़्फ़ात के अनवार के बयान से महू कर दिया।

सूरह इख़लास के मज़ामीन

इस सूरह मे इस्लाम के सबसे अहम अकीदे अल्लाह ताला की वहदानीयत को बयान किया गया है।

तर्जुमा और तफ़सीर

कुल हुअ अल्लाहु अहद (.) अल्लाहुस समद (.) लम यलिद, वलम यूलद(.) वलम यकुन्ल्लहु कुफ़ुवन अहद(.)

तर्जुमा

तुम फ़रमाओ, वो अल्लाह है वो एक है। अल्लाह बे नियाज़ है। न उसकी कोई औलाद है, न वो किसी से पैदा हुआ। और न कोई उसके जोड़ का है।

कुल हुअ अल्लाहु अहद ( तुम फ़रमाओ वो अल्लाह एक है )

अरब में कुफ़्फ़ार की बहुत सी किस्में थीं। दहरिया, मुशरीक, अल्लाह ताला के सिफ़्फ़ात के मुनकर और अल्लाह ताला के लिए औलाद मानने वाले वगैरा। इस सूरह में इन सब की तरदीद है।

हुअ अल्लाह फरमाने मे दाहरियों को तरदीद है। अहद फरमाने मे मुश्रिकीन का मुकम्मल रद्द है। इसके आगे की आयात मे बाकी के सभी कुफ़्फ़ार का रद्द है। इरशाद फ़रमाया कि वह अल्लाह एक है यानि रबूबीयत और उलूहियत में, अजमत व कमाल कि सिफ़्फ़ात के साथ मौसूफ़ है। उसकी न कोई मिस्ल है, न नज़ीर न शबीय। उसका कोई शरीक नहीं है।

अल्लाहूस समद (अल्लाह बे नियाज़ है)

इरशाद फ़रमाया कि अल्लाह ताला हर चीज से बे नियाज़ है, न खाये, न पिये, हमेशा से है और हमेशा रहेगा। किसी काम मे किसी का ज़रूरतमंद नहीं।

लम यलिद, वलम यूलद (न उसने किसी को जन्म दिया और न वह किसी से पैदा हुआ)

अल्लाह ताला औलाद से पाक है क्योंकि औलाद बाप कि जींस से होती है और अल्लाह ताला उससे पाक है। इसी तरह वह खुद किसी से पैदा नहीं हुआ है क्यौंकी वह क़दीम है है यानि हमेशा से है और और पैदा होना उस चीज कि शिफ़्फ़त है जो पहले से न हो और बाद मे वजूद मे आया हो। इसमें मुश्रिकीन और यहूद व नसारा सबकी तरदीद है। मुश्रिकीन फरिश्तों को अल्लाह ताला की लड़कियां कहते थे, यहूदी हज़रत उजैर अलैहि सलाम को जबकि ईसाई हज़रत ईसा अलैहि सलाम को खुदा का बेटा कहते थे।

वलम यकुन्ल्लहु कुफ़ुवन अहद (और न कोई उसके जोड़ का है)

यानि न ज़ात मे न सिफ़्फ़ात में अल्लाह का कोई जोड़ीदार नहीं है। क्योंकि वह वाजिब है, ख़ालिक़ है, बाकी सब मुमकिन, मख़लूक़ और हादिश है। उसकी सिफ़्फ़ात ज़ाती क़दीम गैर महदूद है जबकि मख़लूक़ की सिफ़्फ़ात अताई, हादिस और महदूद है।

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