क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे या जुज़। उनके नाम, रुकू और आयतों की तादाद।

क़ुरआन शरीफ़ अल्लाह का कलाम है। उसकी तिलावत में आसानी के लिए उलेमाओं ने उसे 30 पारे या जुज़ मे तकसीम किया। आइए क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे या जुज़ के बारे में जानते हैं।

सबसे पहले आपको बता दें कि क़ुरआन शरीफ़ एक मुकम्मल किताब है और वो आयतों के रूप में नाज़िल हुई थी। जब इन आयतों को इकट्ठा करके एक किताब कि शक्ल में बनाया गया। पुराने जमाने में क़ुरआन शरीफ़ की मुकम्मल किताब ज्यादा न होने के कारण सभी लोगों तक नहीं पहुँच पाती थी। इसलिए इसे आसान बनाने के लिए और सभी लोगों के लिए मुहयया कराने के इरादे से क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे बने।

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे बनाए जाने के पीछे एक हिकमत ये भी है कि हर रोज़ एक पारे की दर से 30 दिन यानि 1 महीने में क़ुरआन शरीफ़ को मुकम्मल किया जा सके। खास कर रमज़ान के महीने जब तरावीह में पूरी क़ुरआन शरीफ़ पढ़ाई जाती है।

तो आइये क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे के बारे में जानते हैं।

1. अलिफ़ लाम मीम

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है अलिफ़ लाम मीम

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह फ़ातिहा के अल्हम्दुलिल्लाह लफ़्ज़ से होती है। ये पारा सूरह अल बक़र की 141वीं आयत के लफ़्ज़े याअमलून पर खत्म होता है इसके आगे दूसरा पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल फ़ातिहा ( 7 आयतें)
  2. सूरह अल बक़र (141 आयतें)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 148 आयतें है जिनमें से 7 आयतें सूरह अल फ़ातिहा की और 141 आयतें सूरह अल बक़र की। यहाँ हमने इन दोनों सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से एक रुकू सूरह अल फ़ातिहा का और बाकी के 16 रुकू सूरह अल बक़र के हैं। अमूमन सूरह अल फ़ातिहा का रुकू, 0 नंबर का रुकू माना जाता है (चूंकि ये सूरह उम्मुल किताब काही जाती है इसलिए जब भी क़ुरआन खोलें इस सूरह को ज़रूर पढ़ें)) और फिर सूरह अल बक़र का पहला रुकू इस पारे का रुकू नंबर 1 माना जाता है इसलिए इस पारे के आखिर में आप 16 रुकू ही देखते हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

2. सयाकूलु

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से दूसरा पारा है सयाकूलु

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल बक़र की 142वीं आयत के लफ़्ज़े सयाकूलुस सुफ़हाओ से होती है। ये पारा सूरह अल बक़र की 252वीं आयत के लफ़्ज़े मुरसलीन पर खत्म होता है इसके आगे तीसरा पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में सिर्फ सूरह अल बक़र ही आती है।

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 111 आयतें है ये सभी 111 आयतें सूरह अल बक़र की हैं।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलाकर 16 रुकू हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

3. तिलकर रुसूलु

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से तीसरा पारा है तिलकर रुसूलु

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल बक़र की आयत नम्बर 253 के लफ़्ज़े तिलकर रुसूलु से होती है। ये पारा सूरह आले इमरान की 91वीं आयत के लफ़्ज़े नासेरीन पर खत्म होता है इसके आगे चौथा पारा शुरू होता है।

91वीं

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे की तिलावत के दरमियान 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल बक़र (आयत 253-286)
  2. सूरह आले इमरान ( आयत 1-91)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 125 आयतें है जिनमें से 34 आयतें सूरह अल बक़र की और 91 आयतें सूरह आले इमरान की है। यहाँ हमने इन सूरह आले इमरान की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलाकर 17 रुकू हैं जिनमें से 8 रुकू सूरह अल बक़र का और बाकी के 9 रुकू सूरह आले इमरान के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

4. लन तनालु (लन तनालुल बिर्रु)

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से चौथा पारा है लन तनालु

इस पारे कि शुरुवात सूरह आले इमरान की 92वीं आयत के लन तनालुल बिर्रु लफ़्ज़ से होती है। ये पारा सूरह अन निसा की 23वीं आयत के लफ़्ज़े रहीमा पर खत्म होता है इसके आगे पाँचवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह आले इमरान ( आयत 92-200)
  2. सूरह अन निसा (आयत 1-23)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 132 आयतें है जिनमें से 109 आयतें सूरह आले इमरान की और 23 आयतें सूरह अन निसा की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 14 रुकू हैं जिनमें से 11 रुकू सूरह आले इमरान का और बाकी के 3 रुकू सूरह अन निसा के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

5. वल्मुहसिनातु

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पाँचवाँ पारा है वल्मुहसिनातु

इस पारे कि शुरुवात सूरह अन निसा की 24वीं आयत के लफ़्ज़े वल्मुहसिनातू से होती है। ये पारा सूरह अन निसा की 147वीं आयत के लफ़्ज़े अलीमा पर खत्म होता है इसके आगे छठवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में सिर्फ सूरह अन निसा ही आती है।

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 124 आयतें है

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

6. ला युहिब्बुल्लाह

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है ला युहिब्बुल्लाह

इस पारे कि शुरुवात सूरह अन निसा की 148वीं आयत के लफ़्ज़े ला युहिब्बुल्लाह से होती है। ये पारा सूरह अल मायदा की 82वीं आयत के लफ़्ज़े ल यस्तक्बेरून पर खत्म होता है इसके आगे सातवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अन निसा ( आयत 148-176)
  2. सूरह अल मायदा (आयत 1-82)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 111 आयतें है जिनमें से 29 आयतें सूरह अन निसा की और 82 आयतें सूरह अल मायदा की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 14 रुकू हैं जिनमें से 4 रुकू सूरह अन निसा का और बाकी के 10 रुकू सूरह अल मायदा के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

7. व इज़ा समिउ

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से सातवाँ पारा है व इज़ा समिउ

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल मायदा की 83वीं आयत के लफ़्ज़े व इज़ा समिउ से होती है। ये पारा सूरह अल अनआम की 110वीं आयत के लफ़्ज़े यामहून पर खत्म होता है इसके आगे आठवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल मायदा (आयत 83-120)
  2. सूरह अल अनआम (आयत 1-110)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 148 आयतें है जिनमें से 38 आयतें सूरह अल मायदा की और 110 आयतें सूरह अल अनआम की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 19 रुकू हैं जिनमें से 6 रुकू सूरह अल मायदा का और बाकी के 13 रुकू सूरह अल बक़र के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

8. वलव अन्नना

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से आठवाँ पारा है वलव अन्नना

तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अल अनआम की 111वीं आयत के लफ़्ज़े वलव अन्नना होती है। ये पारा सूरह अल अरआफ़ की 87वीं आयत के लफ़्ज़े खैरुल हाकेमीन पर खत्म होता है इसके आगे नौवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अनआम ( आयत 111-165)
  2. सूरह अल अरआफ़ (आयत 1-87)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 142 आयतें है जिनमें से 55 आयतें सूरह अल अनआम की और 87 आयतें सूरह अल अरआफ़ की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से 7 रुकू सूरह अल अनआम की और बाकी के 10 रुकू सूरह अल अरआफ़ के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

9. क़ालल मलाओ

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से नौवाँ पारा है क़ालल मलाओ

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल अरआफ़ की 88वीं आयत के लफ़्ज़े क़ालल मलाओ होती है। ये पारा सूरह अल अंफ़ाल की 40वीं आयत के लफ़्ज़े नेअमन नसीर पर खत्म होता है इसके आगे दसवां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अरआफ़ ( आयत 88-206)
  2. सूरह अल अंफ़ाल (आयत 1-40)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 159 आयतें है जिनमें से 119 आयतें सूरह अल अरआफ़ की और 40 आयतें सूरह अल अंफ़ाल की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 18 रुकू हैं जिनमें से 14 रुकू सूरह अल अरआफ़ का और बाकी के 4 रुकू सूरह अल अंफ़ाल के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • ये सजदा सूरह अल अरआफ़ के आखिरी आयत में और इस पारे के 14वें रुकू पर है।

10. वाअलमु

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से दसवाँ पारा है वाअलमु

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल अंफ़ाल की 41वीं आयत के लफ़्ज़े वाअलमु से होती है। ये पारा सूरह अत तौबा की 93वीं आयत के लफ़्ज़े याअलमून पर खत्म होता है इसके आगे ग्यारहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अंफ़ाल( आयत 41-75)
  2. सूरह अत तौबा (आयत 1-93)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 128 आयतें है जिनमें से 35 आयतें सूरह अल अंफ़ाल की और 93 आयतें सूरह अत तौबा की।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से 6 रुकू सूरह अल अंफ़ाल का और बाकी के 11 रुकू सूरह अत तौबा के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

11. याअतज़ेरून

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से ग्यारहवाँ पारा है याअतज़ेरून

इस पारे कि शुरुवात सूरह अत तौबा की 94वीं आयत के लफ़्ज़े याअतज़ेरून से होती है। ये पारा सूरह हूद की 5वीं आयत के लफ़्ज़े बेज़ातिस सुदूर पर खत्म होता है इसके आगे बारहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 3 सूरतें आती है

  1. सूरह अत तौबा (आयत 94-129)
  2. सूरह यूनुस (आयत 1-109)
  3. सूरह हूद (आयत 1-5)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 150 आयतें है जिनमें से 36 आयतें सूरह अत तौबा की और 109 आयतें सूरह यूनुस की और 5 आयतें सूरह हूद की हैं। यहाँ हमने इन दोनों दरमियानी सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 16 रुकू हैं जिनमें से 5 रुकू सूरह अत तौबा का और बाकी के 11 रुकू सूरह यूनुस के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

12.वमा मिन दाब्बतिन

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है वमा मिन दाब्बतिन

इस पारे कि शुरुवात सूरह हूद की 6वीं आयत के लफ़्ज़े वमा मिन दाब्बतिन से होती है। ये पारा सूरह यूसुफ की 52 वीं आयत के लफ़्ज़े कैदल खाएनीन पर खत्म होता है इसके आगे तेरहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह हूद ( आयत 6-123)
  2. सूरह यूसुफ (आयत 1-52)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 170 आयतें है जिनमें से 118 आयतें सूरह हूद की और 52 आयतें सूरह यूसुफ की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 16 रुकू हैं जिनमें से 10 रुकू सूरह हूद का और बाकी के 6 रुकू सूरह यूसुफ़ के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

13. वमा उबर्रियो

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है वमा उबर्रियो

इस पारे कि शुरुवात सूरह यूसुफ़ की 53वीं आयत के लफ़्ज़े वमा उबर्रियो से होती है। ये पारा सूरह अल हिज्र की पहली आयत के लफ़्ज़े अनिम मुबीन पर खत्म होता है इसके आगे चौदहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 4 सूरतें आती है

  1. सूरह अल यूसुफ (आयत 53-111)
  2. सूरह अर राअद (आयत 1-43)
  3. सूरह इब्राहीम (आयत 1-52)
  4. सूरह अल हिज्र (आयत 1)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 155 आयतें है जिनमें से 59 आयतें सूरह यूसुफ की और 43 आयतें सूरह अर राअद की और 52 आयतें सूरह इब्राहीम की और 1 आयत सूरह अल हिज्र की हैं। यहाँ हमने इन तीनों दरमियानी सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 19 रुकू हैं जिनमें से 6 रुकू सूरह यूसुफ का और 6 रुकू सूरह अर राअद के और 7 रुकू सूरह इब्राहीम का है।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • इस पारे के आठवें रुकू में और सूरह रअद के 15वीं आयत पर सजदा है

14. रोबमा

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है रोबमा

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल हिज्र की दूसरी आयत के लफ़्ज़े रोबमा से होती है। ये पारा सूरह अन नहल की 128वीं आयत के लफ़्ज़े मुहसेनीन पर खत्म होता है इसके आगे पंद्रहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल हिज्र (आयत 2-99)
  2. सूरह अन नहल (आयत 1-128)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 226 आयतें है जिनमें से 98 आयतें सूरह अल हिज्र की और 128 आयतें सूरह अन नहल की। यहाँ हमने बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 22 रुकू हैं जिनमें से 6 रुकू सूरह अल हिज्र के और बाकी के 16 रुकू सूरह अन नहल के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • इस पारे के 12वीं रुकू में और सूरह अन नहल की 50वीं आयत पर सजदा है।

15. सुबहानल लज़ी

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है सुबहानल लज़ी

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह बनी इसराईल की पहली आयत के लफ़्ज़े सुबहानल लज़ी से होती है। ये पारा सूरह अल कहफ़ की 74वीं आयत के लफ़्ज़े शैअन नुकरा पर खत्म होता है इसके आगे सोलहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह बनी इसराईल (आयत 1-111)
  2. सूरह अल कहफ़ (आयत 1-74)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 175 आयतें है जिनमें से 111 आयतें सूरह बनी इसराईल की और 74 आयतें सूरह अल कहफ़ की। यहाँ हमने इन दोनों सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 21 रुकू हैं जिनमें से 12 रुकू सूरह बनी इसराईल के और बाकी के 9 रुकू सूरह अल कहफ़ के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • ये सजदा इस पारे के 12वीं रुकू पर और सूरह बनी इसराईल की 109वीं आयत पर है।

16. क़ाला अलम

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है क़ाला अलम

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल कहफ़ की 75वीं आयत के लफ़्ज़े क़ाला अलम से होती है। ये पारा सूरह ताहा की 135वीं आयत के लफ़्ज़े मनिहतदा पर खत्म होता है इसके आगे सत्रहवाँ पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 3 सूरतें आती है

  1. सूरह अल कहफ़ ( आयत 75-110 )
  2. सूरह मरयम ( आयत 1-98)
  3. सरह ताहा (आयत 1-135)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 269 आयतें है जिनमें से 36 आयतें सूरह अल कहफ़ की, 98 आयतें सूरह मरयम की और 135 आयतें सूरह ताहा की हैं। यहाँ हमने इन दोनों दरमियानी सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से एक 3 सूरह अल कहफ़ के, 6 रुकू सूरह मरयम के हैं और 8 रुकू सूरह ताहा के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • सूरह मरयम की 57वीं आयत और इस पारे के 7वें रुकू में एक सजदा है।

17. इकतरब लिन्नास

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है इकतरब लिन्नास

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अल अम्बिया की पहली आयत के लफ़्ज़े इकतरब लिन्नास से होती है। ये पारा सूरह अल हज्ज की 78वीं आयत के लफ़्ज़े नेअमन नसीर पर खत्म होता है इसके आगे 18वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अंबिया (आयत 1-112)
  2. सूरह अल हज्ज (आयत 1-78)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 190आयतें है जिनमें से 112 आयतें सूरह अल अम्बिया की और 78 आयतें सूरह अल हज्ज की। यहाँ हमने इन दोनों सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से 7 रुकू सूरह अल अम्बिया के और बाकी के 10 रुकू सूरह अल हज्ज के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

  • सूरह अल हज्ज की 18वीं आयत और इस पारे की 9वीं रुकू में
  • सूरह अल हज्ज की 77वीं आयत और इस पारे की 17वीं रुकू में दूसरा सजदा है। ये सजदा इमाम साफई रहमत उल्लाह ताला अलैहि के मानने वालों के लिए है।

18. क़द अफ़्लह

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है क़द अफ़्लह

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अल मोमिनीन की पहली आयत के लफ़्ज़े क़द अफ़्लह से होती है। ये पारा सूरह अल फ़ुर्कान की 20वीं आयत के लफ़्ज़े बसीरा पर खत्म होता है इसके आगे 19वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 3 सूरतें आती है

  1. सूरह अल मोमिनीन (आयत 1-118)
  2. सूरह अन नूर (आयत 1-64)
  3. सूरह एएल फ़ुर्कान (आयत 1-20)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 202 आयतें है जिनमें से 118 आयतें सूरह अल मोमिनीन की, 64 आयतें सूरह अन नूर की, और 20 आयतें सूरह अल फुरकान की हैं। यहाँ हमने इन तीनों सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से 6 रुकू सूरह अल मोमिनीन के, 9 रुकू सूरह अन नूर के और बाकी के 2 रुकू सूरह अल फुरकान के हैं।

19. वकालल लज़ीना

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है वकालल लज़ीना

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल फ़ुर्कान की 21वीं आयत के लफ़्ज़े वकालल लज़ीना से होती है। ये पारा सूरह अन नमल की 59वीं आयत के लफ़्ज़े अम्मा युशरेकून पर खत्म होता है इसके आगे 20वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 3 सूरतें आती है

  1. सूरह अल फुरकान (आयत 21-77)
  2. सूरह अश शुअरा (आयत 1-227)
  3. सूरह अन नमल (आयत 1-59)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 343 आयतें है जिनमें से 57 आयतें सूरह अल फुरकान की, 227 आयतें सूरह अश शुअरा की और 59 आयतें सूरह अन नमल की हैं। यहाँ हमने इन दोनों दरमियानी सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 19 रुकू हैं जिनमें से 4 रुकू सूरह अल फ़ुर्कान के, 11 रुकू सूरह अश शुअरा के और 4 रुकू सूरह अन नमल के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में 2 सजदे है।

  • सूरह अल फ़ुर्कान के 60वीं आयत पर
  • सूरह अन नमल की 26वीं आयत पर

20. अम्मन ख़लक़

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 20वां पारा है अम्मन ख़लक़

इस पारे कि शुरुवात सूरह अन नमल की 60वीं आयात के लफ़्ज़े अम्मन ख़लक़ से होती है। ये पारा सूरह अल अनकबूत की 44वीं आयत के लफ़्ज़े मोमिनीन पर खत्म होता है इसके आगे 21वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 3 सूरतें आती है

  1. सूरह अन नमल (आयत 60-93)
  2. सूरह अल कसस (आयत 1-88)
  3. सूरह अल अनकबूत( आयत 1-44)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 166 आयतें है जिनमें से 34 आयतें सूरह अन नमल की, 88 आयतें सूरह अल कसस की और 44 आयतें सूरह अल अनकबूतकी हैं।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 16 रुकू हैं जिनमें से 3 रुकू सूरह अन नमल के, 9 रुकू सूरह अल कसस के और 4 रुकू सूरह अल अनकबूत के हैं।

21. उतलो मा ऊहिय

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 21वां पारा है उतलो मा ऊहिय

इस पारे कि शुरुआत सूरह अल अनकबूत की 45वीं आयत के लफ़्ज़े उतलो मा ऊहिय से होती है। ये पारा सूरह अल अहज़ाब की 30वीं आयत के लफ़्ज़े यसीरा पर खत्म होता है इसके आगे 22वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 5 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अनकबूत (आयत 45-69)
  2. सूरह अर रूम (आयत 1-60)
  3. सूरह लुक़मान (आयत 1-34)
  4. सूरह अस सजदा (आयत 1-30)
  5. सूरह अल अहज़ाब (आयत 1-30)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 179 आयतें है जिनमें से 25 आयतें सूरह अल अनकबूत की, 60 आयतें सूरह अर रूम की, 34 आयतें सूरह लुक़मान की, 30 आयतें सूरह अस सजदा की और 30 आयतें सूरह अल अहज़ाब की हैं। यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 19 रुकू हैं। जिनमें से 3 रुकू सूरह अल अनकबूत के, 6 रुकू सूरह अर रूम के, 4 रुकू सूरह लुक़मान के,3 रुकू सूरह अस सजदा के और बाकी के 3 रुकू सूरह अल अहज़ाब के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • सूरह अससजदा की 15वीं आयत पर

22. व मय्न्यक्नुत

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है व मय्न्यक्नुत

इस पारे कि शुरुवात सूरह अल अहज़ाब की 31वीं आयत के लफजे व मय्न्यक्नुत होती है। ये पारा सूरह यासीन की 21वीं आयत के लफ़्ज़े मुहतदून पर खत्म होता है इसके आगे 23वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 4 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अहज़ाब (आयत 31-73)
  2. सूरह सबा (आयत 1-54)
  3. सूरह फ़ातिर (आयत 1-45)
  4. सूरह यासीन (आयत 1-21)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 163 आयतें है जिनमें से 43 आयतें सूरह अल अहज़ाब की, 54 आयतें सूरह सबा की, 45 आयतें सूरह फ़ातिर की और 21 आयतें सूरह यासीन की हैं। यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 18 रुकू हैं जिनमें से 6 रुकू सूरह अल अहज़ाब के, 6 रुकू सूरह सबा के, 5 रुकू सूरह फ़ातिर के और 1 रुकू सूरह यासीन के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में कोई सजदा नहीं है।

23. वमा लिय

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 23वां पारा है वमा लिय

इस पारे कि शुरुवात सूरह यासीन की 22वीं आयत के लफ़्ज़े वमा लिय से होती है। ये पारा सूरह अज़ ज़ुमर की 31वीं आयत के लफ़्ज़े यख्तसेमून पर खत्म होता है इसके आगे 24वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 4 सूरतें आती है

  1. सूरह यासीन (आयत 22-83)
  2. सूरह अस सफ़्फ़ात (आयत 1-182)
  3. सूरह सॉद (आयत 1-88)
  4. सूरह अज़ ज़ुमर (आयत 1-31)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 363 आयतें है जिनमें से 62 आयतें सूरह यासीन की, 182 आयतें सूरह अस सफ़्फ़ात की, 88 आयतें सूरह सॉद की और 31 आयतें सूरह अज़ ज़ुमर की हैं। यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं जिनमें से 4 रुकू सूरह यासीन के, 5 रुकू सूरह अस सफ़्फ़ात के, 5 रुकू सूरह सॉद के और 3 रुकू सूरह अज़ ज़ुमर के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • सूरह सॉद की 24वीं आयत पर

24. फ़मन अजलमों

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 24वां पारा है फ़मन अजलमों

इस पारे कि शुरुवात सूरह अज़ ज़ुमर के लफ़्ज़े फ़मन अजलमों से होती है। ये पारा सूरह हामीम अस्सज्दा की 42वीं आयत के लफ़्ज़े लिलअबीद पर खत्म होता है इसके आगे 25वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 3 सूरतें आती है

  1. सूरह अज़ ज़ुमर (आयत 32-75)
  2. सूरह अल मोमिन (आयत 1-85) इस सूरह को सूरह गाफ़िर भी कहते हैं
  3. सूरह हामीम अस्सज्दा (आयत 1-45) इस सूरह को सूरह फुस्सिलत भी कहते हैं।

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 175 आयतें है जिनमें से 44 आयतें सूरह अज़ ज़ुमर की, 85 आयतें सूरह अल मोमिन की, और 46 आयतें सूरह फुस्सिलत की हैं। यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 19 रुकू हैं जिनमें से 5 रुकू सूरह अज़ ज़ुमर के, 9 रुकू सूरह अल मोमिन के और 5 रुकू सूरह फुस्सिलत के हैं।

सजदों की तादाद

इस पारे में सजदा है।

  • सूरह हामीम अस्सज्दा की 38वीं आयत पर

25. इलैहि युरद्दो

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 25वां पारा है इलैहि युरद्दो

इस पारे कि शुरुवात सूरह हामीम अस्सज्दा की 47वीं आयत के लफ़्ज़े इलैहि युरद्दो से होती है। ये पारा सूरह अल जाशिया की 37वीं आयत के लफ़्ज़े हकीम पर खत्म होता है इसके आगे 26वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 2 सूरतें आती है

  1. सूरह हामीम अस्सज्दा ( आयत 47-54)
  2. सूरह अश शूरा (आयत 1-53)
  3. सूरह अज़ ज़ुख़रुफ़ (आयत 1- 89)
  4. सूरह अद दुखान (आयत 1-59)
  5. सूरह अल जाशिया (आयत 1-37)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 245 आयतें है जिनमें से 7 आयतें सूरह हामीम अस्सज्दा की, 53 आयतें सूरह अश शूरा की, 89 आयतें सूरह अज़ ज़ुख़रुफ़ की, 59 आयतें सूरह अद दुखान की, और 37 आयतें सूरह अल जाशिया की हैं। यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 20 रुकू हैं जिनमें से एक रुकू सूरह हामीम अस्सज्दा का, 5 रुकू सूरह अश शूरा के, 7 रुकू सूरह अज़ ज़ुख़रुफ़ के, 3 रुकू सूरह अद दुखान के, और बाकी के 4 रुकू सूरह अल जाशिया के हैं।

26. हा मीम

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 26वां पारा है हा मीम

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अल अहक़ाफ़ की पहली आयत के लफ़्ज़े हामीम (हुरूफ़े मुक़त्त-अत) से होती है। ये पारा सूरह अज़ ज़ारियात की 30वीं आयत के लफ़्ज़े अलीम पर खत्म होता है इसके आगे 27वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 6 सूरतें आती है

  1. सूरह अल अहक़ाफ़ ( आयत 1-35)
  2. सूरह मुहम्मद ( आयत 1-38)
  3. सूरह अल फ़तह (आयत 1-29)
  4. सूरह हुजूरात (आयत 1-18)
  5. सूरह क़ाफ़ (आयत 1-45)
  6. सूरह अज़ ज़ारियात (आयत 1-30)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 195 आयतें है जिनमें से 35 आयतें सूरह अल आहक़ाफ़ की, 38 आयतें सूरह मुहम्मद की, 29 आयतें सूरह अल फ़तह की, 18 आयतें सूरह हुजूरात की, 45 आयतें सूरह क़ाफ़ की और 30 आयतें सूरह अज़ ज़ारियात की हैं। यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 18 रुकू हैं। सूरतों की तरतीब से रुकुओं की तादाद कुछ इस तरह हैं

  1. सूरह अल अहक़ाफ़ (4 रुकू)
  2. सूरह मुहम्मद ( 4 रुकू)
  3. सूरह अल फ़तह (4)
  4. सूरह हुजूरात (2 रुकू)
  5. सूरह क़ाफ़ (3 रुकू)
  6. सूरह अज़ ज़ारियात (1 रुकू)

27. क़ाला फ़मा ख़त्बोकुम

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से पहला पारा है क़ाला फ़मा ख़त्बोकुम

इस पारे कि शुरुवात सूरह अज़ ज़ारियात की 31वीं आयत के लफ़्ज़े क़ाला फ़मा ख़त्बोकुम से होती है। ये पारा सूरह अल हदीद की 29वीं आयत के लफ़्ज़े अज़ीम पर खत्म होता है इसके आगे 28वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 7 सूरतें आती है

  1. सूरह अज़ ज़ारियात ( आयत 31-60)
  2. सूरह अत तूर (आयत 1- 49)
  3. सूरह अन नज्म (आयत 1-62)
  4. सूरह अल क़मर (आयत 1- 55)
  5. सूरह अर रहमान ( आयत 1- 78)
  6. सूरह अल वाकिया (आयत 1-96)
  7. सूरह अल हदीद (आयत 1-29)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 399 आयतें है। अगर सूरतों के हिसाब से देखें तो

  1. सूरह अज़ ज़ारियात ( आयत 31-60) ( 30)
  2. सूरह अत तूर (आयत 1- 49) (49)
  3. सूरह अन नज्म (आयत 1-62) (62)
  4. सूरह अल क़मर (आयत 1- 55)(55)
  5. सूरह अर रहमान ( आयत 1- 78)(78)
  6. सूरह अल वाकिया (आयत 1-96)(96)
  7. सूरह अल हदीद (आयत 1-29)(29)

यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं। अगर सूरतों के हिसाब से देखें तो

  1. सूरह अज़ ज़ारियात (2)
  2. सूरह अत तूर (2)
  3. सूरह अन नज्म (3)
  4. सूरह अल क़मर (3)
  5. सूरह अर रहमान (3)
  6. सूरह अल वाकिया (3)
  7. सूरह अल हदीद (4)

सजदों की तादाद

इस पारे में एक सजदा है।

  • सूरह अन नज्म की 62वीं आयत पर

28. क़द समेअल्लाहो

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 28वां पारा है क़द समेअल्लाहो

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अल मुजादलत की पहली आयत के लफ़्ज़े क़द समेअल्लाहो से होती है। ये पारा सूरह अत तहरीम की 12वीं आयत के लफ़्ज़े कानेतीन पर खत्म होता है। इसके आगे 29वां पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 9 सूरतें आती है

  1. सूरह अल मुजादलत ( आयत 1-22)
  2. सूरह अल हश्र (आयत 1-24)
  3. सूरह अल मुमतहेनत (आयत 1-13)
  4. सूरह अस सफ़्फ़ा (आयत 1-14)
  5. सूरह अल जुमुआ (आयत 1-11)
  6. सूरह आल मुनाफ़ेकून (आयत 1-11)
  7. सूरह अत तगाबुन (आयत 1-18)
  8. सूरह अत तलाक़ (आयत 1-12)
  9. सूरह अत तहरीम (आयत 1-12)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 135 आयतें है। सूरतों के हिसाब से देखे तो

  1. सूरह अल मुजादलत (22)
  2. सूरह अल हश्र (22)
  3. सूरह अल मुमतहेनत (13)
  4. सूरह अस सफ़्फ़ा (14)
  5. सूरह अल जुमुआ (11)
  6. सूरह आल मुनाफ़ेकून(11)
  7. सूरह अत तगाबुन (18)
  8. सूरह अत तलाक़ (12)
  9. सूरह अत तहरीम (12)

इन सूरतों के दरमियान आने वाले बिस्मिल्लाह शरीफ को नहीं जोड़ा गया है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 17 रुकू हैं। सूरतों के हिसाब से देखें तो

  1. सूरह अल मुजादलत (3)
  2. सूरह अल हश्र (3)
  3. सूरह अल मुमतहेनत (2)
  4. सूरह अस सफ़्फ़ा (2)
  5. सूरह अल जुमुआ (2)
  6. सूरह आल मुनाफ़ेकून(2)
  7. सूरह अत तगाबुन (2)
  8. सूरह अत तलाक़ (2)
  9. सूरह अत तहरीम (2)

29. तबारकल लज़ी

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 29वां पारा है तबारकल लज़ी

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अल मुल्क की पहली आयत के लफ़्ज़े तबारकल लज़ी से होती है। ये पारा सूरह अल मुरसलात की 50वीं आयत के लफ़्ज़े यूमेनून पर खत्म होता है इसके आगे 30वां और आख़िरी पारा शुरू होता है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 11 सूरतें आती है

  1. सूरह अल मुल्क (आयत 1-30)
  2. सूरह अल क़लम ( आयत 1-52)
  3. सूरह अल हाक़्क़ा (आयत 1- 52)
  4. सूरह अल मआरिज (आयत 1-44)
  5. सूरह नूह (आयत 1-28)
  6. सूरह अल जिन्न (आयत 1-28)
  7. सूरह अल मुज़्ज़म्मिल (आयत 1- 20)
  8. सुरह अल मुद्दस्षिर (आयत 1-56)
  9. सूरह अल कियामा ( आयत 1-40)
  10. सूरह अद दहर ( आयत 1-31)
  11. सूरह अल मुरसलात ( आयत 1-50)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 431 आयतें है। सूरतों के हिसाब से आयातों की तादाद देखें तो –

  1. सूरह अल मुल्क (30)
  2. सूरह अल क़लम (52)
  3. सूरह अल हाक़्क़ा (52)
  4. सूरह अल मआरिज (44)
  5. सूरह नूह (28)
  6. सूरह अल जिन्न (28)
  7. सूरह अल मुज़्ज़म्मिल (20)
  8. सुरह अल मुद्दस्षिर (56)
  9. सूरह अल कियामा (40)
  10. सूरह अद दहर (31)
  11. सूरह अल मुरसलात (50)

यहाँ हमने इन सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 22 रुकू हैं। सूरतों के हिसाब से रुकुओं की तादाद देखें तो

  1. सूरह अल मुल्क (2)
  2. सूरह अल क़लम (2)
  3. सूरह अल हाक़्क़ा (2)
  4. सूरह अल मआरिज (2)
  5. सूरह नूह (2)
  6. सूरह अल जिन्न (2)
  7. सूरह अल मुज़्ज़म्मिल (2)
  8. सुरह अल मुद्दस्षिर (2)
  9. सूरह अल कियामा (2)
  10. सूरह अद दहर (2)
  11. सूरह अल मुरसलात (2)

30. अम्मा

क़ुरआन शरीफ़ के 30 पारे में से 30वां और आख़िरी पारा है अम्मा

अगर हम बिस्मिल्लाह शरीफ़ को हटा दें तो इस पारे कि शुरुवात सूरह अन नबा की पहली आयत के लफ़्ज़े अम्मा से होती है। ये पारा सूरह अन नास की 6ठी आयत के लफ़्ज़े नास पर खत्म होता है और यहीं पर क़ुरान मुकम्मल होती है।

दरमियानी सूरतों की तादाद

इस पारे में 37 सूरतें आती है

  1. सूरह अन नबा (आयत 1-40)
  2. सूरह अन नाज़ियात ( 1- 46)
  3. सूरह अ-ब-स (आयत 1-42)
  4. सूरह अत तकवीर (आयत 1-29)
  5. सूरह अल इंकितार (आयत 1-19)
  6. सूरह अल मुतफ़्फ़ेफीन (आयत 1-36)
  7. सूरह अल इंशिकाक ( आयत 1-25)
  8. सूरह अल बूरूज (आयत 1-22)
  9. सूरह अत तारिक (आयत 1-17)
  10. सूरह अल आला (आयत 1-19)
  11. सूरह अल गाशिया (आयत 1-26)
  12. सूरह अल फ़ज्र (1-30)
  13. सूरह अल बलद (आयत 1-20)
  14. सूरह अश शम्स (आयत 1- 15)
  15. सूरह अल लैल (आयत 1-21)
  16. सूरह अद दुहा (आयत 1-11)
  17. सूरह अलम नशरह (आयत 1-8)
  18. सूरह अत तीन (आयत 1-8)
  19. सूरह अल अलक़ (आयत 1-19)
  20. सूरह अल क़द्र (आयत 1-5)
  21. सूरह अल बय्यिना (आयत 1-8)
  22. सूरह अज़ ज़िल्ज़ाल (आयत 1-8)
  23. सूरह अल आदियात (आयत 1-11)
  24. सूरह अल क़ारिया (आयत 1-11)
  25. सूरह अत तकासुर (आयत 1-8)
  26. सूरह अल अस्र (आयत 1-3)
  27. सूरह अल हुमज़ा (आयत 1-9)
  28. सुरह अल फील (आयत 1-5)
  29. सूरह क़ुरऐश (आयत 1-4)
  30. सूरह अल माऊन (आयत 1-7)
  31. सूरह अल कौसर (आयत 1-3)
  32. सूरह अल काफ़ेरून (आयत 1-6)
  33. सूरह अन नसर (आयत 1-3)
  34. सूरह अल लहब (आयत 1-5)
  35. सूरह अल इख़लास (आयत 1-3)
  36. सूरह अल फलक (आयत 1-5)
  37. सूरह अन नास (आयत 1-6)

आयतों की तादाद

अगर आयतों की बात करें तो इस पारे में कुल 563 आयतें है। सुरतों के हिसाब से आयतों की तादाद देखें तो

  1. सूरह अन नबा (40)
  2. सूरह अन नाज़ियात ( 46)
  3. सूरह अ-ब-स (42)
  4. सूरह अत तकवीर (29)
  5. सूरह अल इंकितार (19)
  6. सूरह अल मुतफ़्फ़ेफीन (36)
  7. सूरह अल इंशिकाक (25)
  8. सूरह अल बूरूज (22)
  9. सूरह अत तारिक (17)
  10. सूरह अल आला (19)
  11. सूरह अल गाशिया (26)
  12. सूरह अल फ़ज्र (30)
  13. सूरह अल बलद (20)
  14. सूरह अश शम्स (15)
  15. सूरह अल लैल (21)
  16. सूरह अद दुहा (11)
  17. सूरह अलम नशरह (8)
  18. सूरह अत तीन (8)
  19. सूरह अल अलक़ (19)
  20. सूरह अल क़द्र (5)
  21. सूरह अल बय्यिना (8)
  22. सूरह अज़ ज़िल्ज़ाल (8)
  23. सूरह अल आदियात (11)
  24. सूरह अल क़ारिया (11)
  25. सूरह अत तकासुर (8)
  26. सूरह अल अस्र (3)
  27. सूरह अल हुमज़ा (9)
  28. सुरह अल फील (5)
  29. सूरह क़ुरऐश (4)
  30. सूरह अल माऊन (7)
  31. सूरह अल कौसर (3)
  32. सूरह अल काफ़ेरून (6)
  33. सूरह अन नसर (3)
  34. सूरह अल लहब (5)
  35. सूरह अल इख़लास (3)
  36. सूरह अल फलक (5)
  37. सूरह अन नास (6)

यहाँ हमने इन दोनों सूरतों की इब्तिदा पर आने वाली बिस्मिल्लाह शरीफ़ को नहीं जोड़ा है।

रुकू की तादाद

इस पारे में कुल मिलकर 39 रुकू हैं। सूरतों के हिसाब से रुकुओं की तादाद देखें तो

  1. सूरह अन नबा (2)
  2. सूरह अन नाज़ियात (2)
  3. सूरह अ-ब-स (1)
  4. सूरह अत तकवीर (1)
  5. सूरह अल इंकितार (1)
  6. सूरह अल मुतफ़्फ़ेफीन (1)
  7. सूरह अल इंशिकाक (1)
  8. सूरह अल बूरूज (1)
  9. सूरह अत तारिक (1)
  10. सूरह अल आला (1)
  11. सूरह अल गाशिया (1)
  12. सूरह अल फ़ज्र (1)
  13. सूरह अल बलद (1)
  14. सूरह अश शम्स (1)
  15. सूरह अल लैल (1)
  16. सूरह अद दुहा (1)
  17. सूरह अलम नशरह (1)
  18. सूरह अत तीन (1)
  19. सूरह अल अलक़ (1)
  20. सूरह अल क़द्र (1)
  21. सूरह अल बय्यिना (1)
  22. सूरह अज़ ज़िल्ज़ाल (1)
  23. सूरह अल आदियात (1)
  24. सूरह अल क़ारिया (1)
  25. सूरह अत तकासुर (1)
  26. सूरह अल अस्र (1)
  27. सूरह अल हुमज़ा (1)
  28. सुरह अल फील (1)
  29. सूरह क़ुरऐश (1)
  30. सूरह अल माऊन (1)
  31. सूरह अल कौसर (1)
  32. सूरह अल काफ़ेरून (1)
  33. सूरह अन नसर (1)
  34. सूरह अल लहब (1)
  35. सूरह अल इख़लास (1)
  36. सूरह अल फलक (1)
  37. सूरह अन नास (1)

सजदों की तादाद

इस पारे में 2 सजदे हैं।

  • सूरह इंशिकाक की 21वीं आयत पर
  • सूरह अल अलक की 19वीं आयत पर

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *