5 Pillars of Islam in a New Non-religious Context.

इस्लाम क्या है? क्या ये एक धर्म है या फिर जीवन जीने का तरीका?

हम सभी जानते हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने इस्लाम के 5 पिल्लर्स बताये हैं जिन्हे हम Five Pillars of Islam के नाम से या इस्लाम के पांच सुतून के नाम से जानते हैं।

अगर मैं अपनी समझ से कहूं तो ये जीवन जीने का तरीका है। सबसे बेहतरीन तरीका है अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने खुद अपने पैग़म्बरों के जरिये हमें बताया है?

आप कैसे कह सकते हैं की इस्लाम जीवन जीने का तरीका है?

चलिए एक नज़र डालते हैं। इस्लाम का शाब्दिक अर्थ होता है शांति।

और जैसा की अल्लाह ताला ने फ़रमाया है।

बेशक अल्लाह के यहाँ इस्लाम (शांति) ही धर्म है।

आले इमरान आयत 19

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने जब से दुनिया बानी है तब से हर क़ौम के लिए एक पैग़म्बर जिनका मक़सद सिर्फ यही होता था की लोग अल्लाह के बताये हुए रास्ते पर चलें।

अल्लाह ताला ने जो रास्ता बताया है उसके 5 सुतून हैं जिन्हें 5 Pillars of Islam कहते हैं।

क्या ये pillars, ये सुतून धार्मिक दृष्टिकोण से हट कर देखने पर काम करते हैं कि नहीं?

बिलकुल करते हैं। आज का हमारा आर्टिकल 5 pillars of Islam पर ही आधारित है मगर, आज हम इसे धार्मिक दृष्टिकोण से हट कर सिर्फ व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखेंगे।

1. शहादा या तौहीद या ईमान

Five Pillars of Islam में सबसे पहला पिलर होता है ईमान। ईमान को अंग्रेजी में Faith बोलते हैं।

Faith मगर किस पर?

धार्मिक नजरिये से देखने पर faith अल्लाह पर होना चाहिए जिसने ये पूरी दुनिया और आपको बनाया है।

अल्लाह ने सिर्फ आपको बनाया ही नहीं है बल्कि आपको कुछ सलाहियतें दी हैं, कुछ हिकमतें भी दी हैं। इस सलाहियतों और हिकमतों के ज़ोर पर आप अपना और अपने परिवार वालों खर्चा उठाते हैं।

धार्मिक नज़रिये से बाहर देखें तो आपको अपनी strength, अपनी capabilities पर फेथ होना चाहिए। जो की अल्लाह ने आप को अटा की है।

आप किसी भी motivational speaker से बात करेंगे तो वो आपको सबसे पहली सलाह यही देता है की have faith in yourself, rely on whatever you have.

इस्लाम का ये पहला पिलर कामयाब होने के सबसे ज़रूरी है फिर चाहे वो दीन हो या दुनिया हो।

2. सलात या नमाज़

5 pillars of Islam में दूसरा पिलर होता है नमाज़ का। इस्लाम में नमाज़ इबादत का एक तरीका होता है जिसमें हम अपने वक़्त और क़ुव्वत के बदले कुछ एक्टिविटीज करके अल्लाह से नेकी पाने की उम्मीद करते हैं।

अगर हम general term में धर्म के नज़रिये से बाहर निकल कर देखें तो नमाज़ को हम Action से तुलना कर सकते हैं।

धार्मिक जीवन का क्या उद्देश्य होता ? इसका उद्देश्य होता है ज्यादा से ज्यादा नेकी जमा करना और ये करने के लिए नमाज़ सबसे तेज़ तरीका है।

वहीँ अगर हम अपने व्यसायिक जीवन की बात करें तो इसका उद्देश्य होता है ज्यादा से ज्यादा दौलत और शोहरत जमा करना। इसके लिए हमें शारीरिक या मानसिक परिश्रम करना पड़ेगा।

तो अगर आपको कामयाबी हासिल करनी है तो आपको परिश्रम करना पड़ेगा फिर चाहे वो दीन में नमाज़ हो या फिर दुनिया में परिश्रम।

3. सौम या रोज़ा

इस्लाम में तीसरा पिलर होता है रोज़ा जिसमें सुबह फजर से मग़रिब के वक़्त तक भूखे रहना होता है।

क्या सिर्फ़ भूखे रहना ही रोज़ा है? जी बिलकुल नहीं।

रोज़ा हकीकत में आपके सब्र की आजमाइश के लिए होता।

सब्र, ये क्या होता है?

सही वक़्त तक बिना किसी जल्दबाज़ी के रुकना ही सब्र है।

ये क्यों अहम है ?

आजमाइश के लिए। अल्लाह हम सब की किसी न किसी तरीके आजमाइश करता और ये आजमाइश तय करती है की हम किस काबिल है।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क़ुरान में फ़रमाया है।

ऐ ईमान वालो सब्र और नमाज़ से मदद मांगो। बेशक अल्लाह सब्र वालों के साथ है।

अ ल बकर आयत 153

जीवन में सफलता हासिल करने के लिए परिश्रम के साथ साथ सब्र बहुत ज़रूरी है। आप किसी भी महान व्यक्ति से अगर सब्र के बारे में पूछेंगे तो वो यही जवाब देंगे कि सब्र करना सीखना पड़ेगा।

4. सदक़ा या ज़कात

आपको अपने आप पर यक़ीन था इसलिए आपने अपनी क्षमता के अनुसार काम करना शुरू कर दिया और सब्र रखा। धीरे – धीरे कुछ वक़्त के बाद आप ने अच्छी खासी दौलत इकठ्ठा करली।

अब क्या करना चाहिए?

इस्लाम ने रास्ता दिखाया और बताया दान करो, ज़कात दो, गरीबों की मदद करो।

ये मदद आप दोनों तरीके से कर सकते हैं चाहे आर्थिक हो या मानसिक। जिनको आर्थिक सहायता की ज़रुरत है उनको आर्थिक सहायता दो अपने प्रॉफिट के 2.5% हिस्से में से या फिर जिनको मानसिक सहायता की ज़र्रोरत है उनको मदद करो शिक्षा देकर।

ये है इस्लाम का चौथा पिलर जिसे ज़कात बोलते हैं।

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5. हज

आपने पैसा कमाया आपने नेकी कमाई अब अगर आपकी हैसियत इतनी है की आप अल्लाह के घर का दीदार कर सको तो उसे करो.

इस प्रक्रिया को हज कहते हैं।

आखरी अल्फ़ाज़

तो भैय्या आसान भाषा में कहूँ तो इस्लाम हमें हर चीज का रास्ता दिखाता है हमें बस उसे सही नज़रिये से देखने की ज़रूत है।

ये 5 pillars of islam हमें किसी भी काम को बेहतरीन ढंग से करने का रास्ता दिखाते हैं। इन 5 pillars of islam में से पहले 3 पिल्लर्स तो बहुत ज़रूरी हैं बाकी के दो पिल्लर्स के लिए कुछ कंडीशन है उसके बाद वो ज़रूरी होते हैं।

कामयाब होने के लिए पहले ३ पिल्लर्स बहुत ज़रूरी है। इन्हे नीचे देखते हैं।

  1. तौहीद (Faith or Confidence )
  2. सलात (Action )
  3. सौम (Patience)

इसको एक सीक्वेंस में लेते हैं, आपको अल्लाह पर फेथ और खुद पर कॉन्फिडेंस है और आपने अपना बिज़नेस शुरू किया और सब्र रखा तो आपकी कामयाबी पक्की है।

उम्मीद करता हूँ ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा और मेरा ये नजरिया भी। अपने दोस्तों को भी शेयर करके ये उम्दा जानकारी दें.

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