5 Blessed ways to Get Ready for the Ramadan? रमज़ान की तैयारी कैसे करें?

रमज़ान आने वाला है और रमज़ान की तैयारी भी ज़रूरी है। आज हमारी ये पोस्ट आपकी मदद करेगी to Get Ready for the Ramadan

रमज़ान की आमद के साथ ही आते हैं बहुत सारे वादे जो हम अपने आपसे करते है। वादे जैसे इस साल रमज़ान में हम अपने अमलों मे बदलाव लाएँगे। हम अपनी ज़िंदगी खुदा की इबादत में गुजारेंगे।

क्या हम हक़ीक़त में बदलते हैं? क्या रमज़ान के दौरान आया ये बदलाव परमानेंट होता है या फिर सिर्फ रमज़ान के लिए ही?

दरहकीकत यह है कि हम में से ज्यादातर लोगों के अंदर रमज़ान मे आने वाला ये बदलाव और दीनी अमल और नेक आमाल का आना सिर्फ रमज़ान तक ही रहता है। रमज़ान के बाद हम फिर से अपनी रोज़ मर्रा कि ज़िंदगी में मशगूल हो जाते हैं और वो सारे वादे भूल जाते हैं जो हमने रमज़ान शुरू होने से पहले किया था।

जब हमें पता है कि हमारे सारे नेक आमाल रमज़ान आने पर ही ज़ाहिर होते हैं तो क्यूँ न हम रमज़ान की तैयारी रमज़ान आने से पहले ही कर दें?

अल्लाह के रसूल अहमद मुजतबा मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वालेहि वसल्लम प्यारे सहाबा रमज़ान का इंतज़ार बड़ी शिद्दत से करते थे और 6 महीने पहले से ही रमज़ान की तैयारी में लग जाते थे। ताकि वो अच्छे से तैयार हो जाएँ और रमज़ान का ज्यादा से ज्यादा फाएदा उठा सकें।

रमज़ान रोज़े रखने का महिना है, जो बरकतों और इनामात से भरा हुआ जिसे हम इस ज़िंदगी में तो पाएंगे ही और साथ ही साथ मौत के बाद भी। ये अल्लाह (सुबहानहु व ताला) के साथ हमारे ताल्लुकात को मजबूत बनाने के लिए एक चैनल का काम करता है। ये हमारे ऐहतराम, याद, आजिज़ी और इंसानियत के जज़्बात को ज़िंदा करता है।

रोज़ा रखना तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर है अगर तुम जाने।

कुरान (2:184)

इसलिए अपने और अपने कामों में बदलाव के लिए रमज़ान का इंतज़ार छोड़ आज ही रमज़ान की तैयारी शुरू करें।

तो, कैसे करें रमज़ान की तैयारी? How to Get Ready for the Ramadan? just follow these basic and simple ways to Get Ready for the Ramadan.

1. तहे दिल से तौबा-व-अस्तगफार करें

मेरे प्यारे भाई, तौबा ऐसा अमल है जो हमें मुसलसल और हमेशा करते रहना चाहिए। ये किसी दिन वक्त तक के लिए महदूद नहीं है। अपने गुनाहों की तौबा के लिए कभी भी कल का इंतिज़ार न करें। आज ही शुरू करें ताकि आप रमज़ान साफ सूथरी हालत में दाखिल हों।

हर रोज़ कुछ वक़्त निकाल कर अपने गुनाहों की तौबा अल्लाह सुबहानहु व ताला से करें और अपने मगफिरत की दुआ मांगें क्योंकि अल्लाह गफूर और रहीम है।

इस तरह आप रमज़ान में इबादत के साथ हल्के व पाकीज़ा दिल के साथ आगे बढ़ सकते हैं। अल्लाह सुबहानहु व ताला का फरमान है।

ऐ ईमान वालों तुम अल्लाह की तरफ तौबा करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ।

कुरान (24:31)

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2.कभी-कभी रोज़ा रखें

अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी मर्ज़ी से रमज़ान से पहले कभी कभी रोज़े रखना आपके शरीर और दिमाग़ को आने वाले इबादत और रोज़े के मुबारक महीने के लिए तैयार करता है। और वैसे भी रमज़ान से पहले वाले महीने यानि शाबान में रोज़े रखना हमारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलैहि वालेहि वसल्लम की सुन्नत है।

हालांकि, अगर आपके लिए हर रोज रोज़े रखना मुमकिन नहीं है तो आप एक दो दिन का वक्फ़ा लेकर रोज़ा रख सकते है। आप कुछ इस तरह कर सकते हैं-

  • पीर और जुमेरात के दिन रोज़ा रखें।
  • हर इस्लामी महीने के पूरे चाँद के दिनों मे रोज़ा रखे जो की 13, 14, और 15 तारीख होती है।

3. कुरान पढ़ने की आदत डालें

हर साल रमज़ान के शुरू में हम अपना खुदा का एक Goal set करते हैंकि इस रमज़ान में हम मुकम्मल कुरान खत्म करेंगे। हालांकि हम में ज़्यादातर लोग इस goal को पूरा नहीं कर पाते हैं।

लिहाजा, इस साल फ़ेल होने से बचने के लिए आप अभी से रोजाना कुरान मजीद पढ़ने कि आदत डाल लें। इसके नतीजे में आप तवील मुद्दत के लिए कुरान मजीद कि तिलावत करने के रागिब होंगे।

थोड़े से शुरुआत करें, हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ने कि आदत डालें फिर चाहे वो 1 सफा हो या फिर कई सूरह पर शर्त है, हर रोज़ पढ़ने की। हर टुकड़ा शुमार होता है फिर चाहे वो कितना ही छोटा क्यूँ न हो। कुरान की तिलावत बरकत की बारिशों को दावत देता है खास तौर पर रमज़ान के महीने में।

4. कुछ Extra नमाजें पढ़ें

चूँकि रमज़ान बरकतों और इबादतों से भरा हुआ महिना है इसलिए इन इबादतों का सवाब पाने के लिए हमें पहले से ही तयार रहना बेहतर है ताकि हम ज्यादा से ज्यादा सवाब हासिल कर सकें।

फर्ज़ नमाजों के अलावा, कुछ इजाफ़ी नफ़िल और तहज़्जुद के लिए भी वक्त निकालें। अभी थोड़ी से एक्सट्रा कोशिश आगे बहुत काम आएगी।

रमज़ान के महीने में इबादत के सारे अमलों का बढ़कर सवाब मिलता है तो क्यूँ न उस सवाब को हासिल करें?

दिन का कोई वक़्त लें और अपने लिए एक schedule बना लें और नींद और आराम के उन औकात को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें और अल्लाह की तरफ हो जाएँ। इन सबके अलावा, अल्लाह से दुआ मांगे क्यूंकी ये अमल अल्लाह को बेहद पसंद है।

5.अपने अंदर झाँके

रोज़े रखना महज़ भूखे रहना, प्यासे रहना या सोहबत से बचना नहीं है बल्कि उससे भी ज़्यादा है। रोज़ा जितना बाहरी अमल है उतना ही अंदरूनी अमल भी है।

ये आपके अंदरूनी एहसासात को पाकीज़ा और आपका अल्लाह के साथ ताल्लुकात को पाक रखने का अमल है। अल्लाह के साथ हमारा रिश्ता हमारे नेक आमाल, अच्छे इरादे और हमारे अंदरूनी किरदार की पाकीज़गी से मुस्तहकम होता है।

रमज़ान ऐसी चीजों से परहेज करने के बारे मे भी है जो मुमकिन तौर पर हमारे दिलो जान को दागदार कर सकते है। इसलिए थोड़ा वक़्त लें और अपने अंदर झाँके हम अपने रोज़मर्रा की ज़िंदागी में ऐसा क्या करते हैं जो हमारे दिल। दिमाग, और रूह को दागदार कर सकते है।

एक बार जब आप जान जाएँ तो, उन आदतों को खत्म करने के लिए रोजाना कोशिश करें। अपने आपको अपने अंदरूनी और अपने आस पास की दुनिया और ऐसी चीजों की तरफ रागिब करें जो आपको अल्लाह की तरफ ले जाए।

एक अच्छा इंसान होने का काम करें और, दयालु, नर्म दिल, मददगार, और अपने आस पास के लोगों के लिए राहत का बाइश बनें। अगर आपको लगता है कि एक अच्छा इंसान बनने के लिए आपमें और सुधार कि ज़रूरत है तो और नेक काम करने करने कि कोशिश करें और बुराई से दूर रहें।

आखिरी अल्फ़ाज़

पहले से कि गयी ये तैयारियाँ और वो एक्सट्रा एफर्ट्स हमारी ज़िंदगी में परमानेंट बदलाव लेकर आएंगे इंशा अल्लाह। लिहाजा टुकड़े टुकड़े में कि गयी ये कोशिशें काफी होंगी to Get Ready for the Ramadan . इनशा अल्लाह।

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