Surah Al Baqrah Verse 8 – Tarjuma and Tafseer in Hindi


Surah Al Baqrah Verse 8 के ज़रिये अल्लाह ताला इंसानो को ये हिदायत देना चाहता है कि अगर इस्लाम में दाखिल हो रहे हो तो पूरी तरह से हो जाओ। दिखावा न करो और न ही फरेब रखो मन में। क्योंकि अल्लाह सब जनता है।

“Wa minannasi mainyaqoolu Amanna billahi wa bilyaumil aakhiri wama hum bemoomineen”

Surah Al Baqrah Verse 8

वामिनन्नासि मैंयक़ूलु आमन्ना बिल्लाहि व बिलयौमिल आख़िरि वमा हुम बेमूमिनीन

तर्जुमा कंज़ुल इरफ़ान – और कुछ लोग कहते हैं की हम अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर ईमान लाये हैं हालाँकि वो ईमान वाले नहीं हैं।


इससे पहले की आयतों में हमने जाना की क्यों कुछ लोग अल्लाह के बताये हुए राहे हक़ से महरूम रह जाते हैं। इसकी बेहतर जानकारी के लिए सूरह अल बक़रह की आयत 7 की तफ़्सीर पढ़ें जो इस लिंक में दी गयी है।

अभी तक अल्लाह ने पहले मोमिन और फिर काफिर के वस्फ़ बयां किये। मगर अब ईमान के ऐतबार से इंसानों की तीसरी मिस्ल, मुनाफ़िक़ का ज़िक्र है।

मुनाफ़िक़ उस इंसान को कहते हैं जो दूसरों के दिखावे में तो मोमिन होता है मगर असलियत में वो इमां वाला नहीं होता।

ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने आगे की चाँद आयतें नाज़िल फ़रमाई हैं। जो हम मजीद आगे पढ़ेंगे। और आज हम इसकी शुरुआत करते हैं।

ये इंसान की वो मिस्ल है जो दुनिया में दूसरों को दिखा कर ईमान वाले काम करते हैं। मगर हक़ीक़त में ये हमेशा बेईमान रहते हैं।

आज हम quran की surah al baqrah verse 8 की तफ़्सीर पढ़ेंगे जिसमें अल्लाह ताला मुनाफ़िक़ों का ज़िक्र करता है। और ज़िक्र अभी आगे कुछ और आयतों तक रहेगा।

व मिनन्नासि मैंयक़ूलु – और कुछ लोग कहते हैं

जैसा पहले ज़िक्र किया गया है इससे पहली आयात में मुक़म्मल ईमान वालों का ज़िक्र किया गया था जिनका ज़ाहिरी और बातिनी दुरुस्त और सलामत था।

फिर उन काफिरों का ज़िक्र किया गया जो सरकशी और कुफ्र पर क़ायम थे।

और अब यहाँ से लेकर आयात नंबर 20 तक मुनाफ़िक़ों का हाल बयां किया गया है जो कि अंदर से काफिर थे और अपने आपको मुसलमान ज़ाहिर करते थे।

surah al baqrah verse 8 का खुलासा ये है कि कुछ लोग अपनी ज़बानों से इस तरह कहते हैं कि हम अल्लाह ताला पर और आख़िरत के दिन पर ईमान ले आये हैं। जबकि वह ईमान लाने वाले नहीं हैं क्योंकि उनका ज़ाहिर उनके बातिन के खिलाफ है बल्कि हक़ीक़त ये है कि वो मुनाफ़िक़ हैं।

Surah Al Baqrah verse 8 मालूम होने वाली चाँद बातें

जब तक दिल में तस्दीक न हो तब तक ज़ाहिरी आमाल मोमिन होने के लिए काफी नहीं हैं।

जो लोग ईमान का दावा करते हैं और कुफ्र का ऐतक़ाद रखते हैं, सब मुनाफ़िक़ हैं।

ये लोग इस्लाम और मुस्लमान के लिए खुले हुए काफिरों से ज़्यादा नुकसान देह हैं।

व मिनन्नासि – और कुछ लोग

Surah Al Baqrah verse 8 में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मुनाफ़िक़ों को कुछ लोग कह कर ख़िताब करता है। इसके पीछे की वजह ये है कि मुनाफ़िक़ों की कुछ अलग वस्फ़ या पहचान नहीं होती वो किसी भी तबके से आ सकते हैं।

मुनाफ़िक़ हमारे और आपके बीच रहने वाले वो इंसान, जो नमाज़े पंजगाना अदा करते हों, रमज़ान के रोज़े रहते हों, हज-ओ-उमरा कई कई बार करके अये हों। मगर ये सब वो सिर्फ दिखावा करने के लिए करते हैं।

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