Surah Falaq in Hindi- 5 ayaton ka Tarruf, Tarjuma aur Tafseer


Surah Falaq quran sharif की 113वीं सूरत है। surah falaq, मशहूर चारों कुल में से एक कुल है। इस सूरह में अल्लाह ताला अपने बन्दों को हर तरह के वसवसों से पनाह मांगने की हिदायत देता है।


Surah Falaq in Hindi – तर्जुमा


“Qul a-oo-zu bi-rabbil falaq. Min sharre ma khalaq. Wa min sharre ghasi-qin iza wa-qab. Wa min shar-rin naffa-saate fil-o-qad. Wa min sharre hase-din iza hasad.

Surah Falaq -(Chapter 113)

क़ुल अ-ऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़। मिन शर्रे मा ख़लक़। व मिन शर्रे ग़ासि-क़िन इज़ा व-क़ब। व मिन शर-रिन नफ्फा-साते फ़िल-ओ-क़द। व मिन शर्रे हासे-दिन इज़ा हसद।

तर्जुमा कंज़ुल इरफ़ान –


Surah Falaq in Hindi – तार्रुफ़


मक़ामे नुज़ूल

एक क़ौल ये है कि Surah Falaq मदीना मुनव्वरा में नाज़िल हुई। और एक क़ौल ये है कि मक्का मुकर्रमा में नाज़िल हुई। पहला क़ौल ज़्यादा सही है क्योंकि इसके शाने नुज़ूल से इसकी ताईद होती है। (खाज़िन, तफ़्सीरे सुरतुल फ़लक़, 4/428)

रुकू और आयात की तादाद

surah falaq में 1 रुकू और ५ आयतें हैं. इस सूरह में 23 कलिमे और 74 हर्फ़ हैं

Falaq नाम रखने की वजह

Falaq के कई माना हैं और यहाँ इस से मुराद सुबह है। चूंकि इस सूरत की पहली आयत में ये लफ्ज़ मौजूद है इस मुनासिबत से इसे Surah Falaq कहते हैं।

Surah Falaq और Surah Naas के फ़ज़ायल

अहादीस में surah falaq और surah naas के बहुत से फ़ज़ायल बयां किये गए हैं। उनमे से 3 नीचे दर्ज किये गए हैं।

फ़ज़ायल #1

हज़रत उक़्बा बिन आमिर रज़ि० से रिवायत है, नबी करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया, ” क्या तुमने नहीं देखा की आज रात मुझपे ऐसी आयतें नाज़िल हुईं हैं जिनकी मिस्ल नहीं देखी गयी। वो आयतें हैं “क़ुल अ-ऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़” और “क़ुल अ-ऊज़ु बि-रब्बिन नास” हैं।”

फ़ज़ायल #2

हज़रत अबू सईद खुदरी रज़ि० फरमाते हैं, हुज़ूर पुरनूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम जिन्नात से और इंसानों की नज़र से पनाह माँगा करते थे। यहाँ तक की सूरह फ़लक़ और सूरह नास नाज़िल हुईं तो आपने इन सूरतों को पढ़ना शुरू कर दिया और इनके अलावा को छोड़ दिया।

फ़ज़ायल #3

हज़रत आबिस जुहनी रज़ि० से रिवायत है, हुजूरे अक़दस सल्लल्लाहो ताला अलैहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया, “क्या मैं तुम्हे वो कलिमात न बताऊँ जो बदमाश जिन्नात और नज़रे बद से अल्लाह की पनाह तलब करने के लिए सबसे अफ़ज़ल है?”

उन्होंने अर्ज़ किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम, “क्यों नहीं?”

तब आक़ा ने अर्ज़ किया, ” वो कलिमात ये दोनों हैं, “क़ुल अ-ऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़” और “क़ुल अ-ऊज़ु बि-रब्बिन नास”

Surah Falaq in hindi और Surah Naas का शाने नुज़ूल

अल्लाह ताला ने अपने महबूब के लिए ये सूरत तब नाज़िल फ़रमाई जब उन पर एक यहूदी, लुबैद बिन आसिम और उसकी बेटियों ने जादू टोना कर दिया था।

उस जादू का असर हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम के जिस्म और ज़ाहिरी ऐज़ा पर पड़े मगर उनके दिल और अक़्ल पर उसका कोई फर्क न पड़ा।

कुछ दिनों बाद हज़रात जिब्रील अलैहि सलाम ए और उन्होंने अर्ज़ की: एक यहूदी ने आप सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम पर जादू किया है। और जादू का जो कुछ सामन है वो फलां कुँए में एक पत्थर के नीचे दबा हुआ है।

रसूल करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम ने हज़रत अलीउल मुर्तज़ा करमल्लाहो वजहूल करीम को भेजा। उन्होंने कुँए से पानी निकालने के बाद पत्थर उठाया तो उसके नीचे से खजूर के दरख़्त के नरम हिस्से से बानी हुई थैली बरामद हुई।

थैली में बरामद सामान

उस थैली में ख़ुसूसन 4 चीज़ें बरामद हुईं –

  1. हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम के बाल जो कंघी से बरामद हुए थे।
  2. हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम की कंघी के कुछ दान्त।
  3. एक डोरा या कमान का चिल्ला जिसमे 11 गिरह लगी थीं।
  4. एक मोम का पुतला जिसमे 11 सुइयाँ चुभी थीं।

ये सारे सामान पत्थर के नीचे से निकाल कर हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम की बारगाह में पेश किये गए।

तब अल्लाह ताला ने ये दोनों सूरतें नाज़िल फ़रमाई। इन दोनों सूरतों में ग्यारह आयतें हैं, 5 surah falaq in hindi में और 6 surah naas में। हर एक आयत पढ़ने के बाद एक गिरह खुलती जाती। यहाँ तक कि सारी गिरहें खुल गयीं और नबी करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्ल्लम तंदुरुस्त हो गए।

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Surah Falaq in hindi- तफ़्सीर


इसके पहले हमने surah falaq in hindi ka तार्रुफ़ पढ़ा. अब हम इसकी तफ़्सीर जानेंगे –

क़ुल अ-ऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़ – तुम फरमाओ मैं सुबह के रब की पनाह लेता हूँ।

पनाह मांगने में अल्लाह ताला का इस वस्फ़ “सुबह के रब” के साथ ज़िक्र इस लिए है कि अल्लाह ताला सुबह पैदा करके रात की तारीकी दूर फरमाता है। तो वह इस पर भी क़ादिर है कि पनाह मांगने वाले से वह हालात दूर कर दे जिससे वो खौफ ज़दा है।

जिस तरह अँधेरी रात में आदमी सुबह तुलूअ होने का इंतज़ार करता है उसी तरह खौफ ज़दा आदमी अमन और रहत का मुन्तज़िर रहता है।

इसके अलावा सुबह मजबूर और लाचार लोगों की दुआओं का और उसके क़ुबूल होने का वक़्त है। तो इस आयत से मुराद ये हुई कि जिस वक़्त करब और ग़म वालों को आसानियाँ दी जाती हैं। और दुआएं क़ुबूल की जाती हैं मैं उस वक़्त को पैदा करने वाले की पनाह चाहता हूँ।

मिन शर्रे मा ख़लक़– उसकी तमाम मख्लूक़ की शर से

इस आयत में हर मख्लूक़ के शर से पनाह मांगी गयी है। चाहे वो जानदार हो या बेजान, मुकल्लिफ़ हो या ग़ैर मुकल्लिफ़। कुछ मुफ़स्सेरीन ने फ़रमाया कि यहाँ मख्लूक़ से मुराद इब्लीस है जिससे बदतर मख्लूक़ में कोई नहीं है।

व मिन शर्रे ग़ासि-क़िन इज़ा व-क़ब – कर सख्त अँधेरी रात के शर से जब वो छा जाये।

उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयेशा रज़ि० से मरवी है कि रसूले अकरम स० ने चाँद की तरफ नज़र करके उनसे फ़रमाया, ” ऐ आयेशा, इसकी शर से अल्लाह की पनाह, ये जब डूब जाये तो अँधेरा हो जाता है।

इस से मुराद महीने की आखिरी रातें हैं जब चाँद छुप जाता है तो जादू के अमल जो बीमार करने के लिए हैं उसी वक़्त किया जाता है।

व मिन शर-रिन नफ्फा-साते फ़िल-ओ-क़द – उन औरतों के शर से जो गिरहों में फूँकती हैं

यहाँ पर गिरहों में फूंकने वाली औरतों से मुराद है वो औरतें जो जादू टोना करती हैं। और डोरियों की गिरह बना कर उसपर फूँक मारती हैं।

जैसे लुबैद की बेटियों ने हुज़ूर स० के साथ किया था।

व मिन शर्रे हासे-दिन इज़ा हसद – और हसद वाले के शर से जब वह मुझसे जले

हसद वाला वो है जो दूसरे की ने-अमत छिन जाने की तमन्ना करे। यहाँ हासिद से बतौर खास यहूदी मुराद हैं जो हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम से हसद करते थे या खास लुबैद बिन आसिम यहूदी है।

उमूमी तौर पर हासिद से पनाह मांगने के लिए ये आयत काफी है।

हसद बदतरीन सिफ़्फ़त है और यही सबसे पहला गुनाह है जो आसमान में इब्लीस से और ज़मीन पर क़ाबिल से हुआ।

हसद और रश्क़ में थोड़ा सा फ़र्क़ होता है। रश्क़ में दूसरों के जैसी ने-अमत अपने पास भी होने की ख्वाहिश होती है मगर इसमें चीन जाने की तमन्ना नहीं होती।

इस सूरते मुबारक से ये मालूम हुआ कि हसद और जादू बदतरीन जुर्म हैं कि आम शरों के बाद इनको खुसूसियत से फ़रमाया गया है।

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