नमाज़े तरावीह क्या है? 20 रकात की कियामुल लैल का तरीका और दुआ।

जैसा आप सभी को पता है रमज़ान आने वाला है। रमज़ान की आमद के साथ ही अल्लाह की रहमतों की बारिश और तेज़ हो जाती है। इस बारिश से अपने आपको शैराब करने के लिए नमाज़े तरावीह बहुत ही अच्छा जरिया निकल कर आता है।

आख़िर नमाज़े तरावीह है क्या? और क्या है तरीक़ा नमाज़े तरावीह पढ़ने का? क्या दुआएं पढ़ीं जाती हैं। जानने के लिए इस पोस्ट आखिर तक पढ़ें।

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नमाज़े तरावीह क्या है?

नमाज़े तरावीह रमज़ान महीने में ईशा की फर्ज़ नमाज़ के बाद शुरू होती है वित्र से पहले खत्म होती है। ये सुन्नत नमाज़ होती है जो 8, 12 या 20 रकत में 2-2 के जोड़े में पढ़ाई जाती है।

ये रमज़ान महीने के चाँद दिखने की शाम होने वाली ईशा नमाज़ शुरू होती है शव्वाल महीने के चाँद दिखने से एक रात पहले तक चलती है।

आजकल ज़्यादातर 20 रकत पढ़ने का चलन है। नमाज़े तरावीह आप घर पर भी पढ़ सकते हैं मगर जमात के इमाम के पीछे क़ुरआन की किरअत सुनते हुये पढ़ने का ज़्यादा सवाब है।

इस नमाज़ को सलातुत तरावीह और कियामुल लैल के नाम से भी जाना जाता है। इन 20 रकातों की नमाज़े तरावीह में हर रोज़ क़ुरआन का कम से कम एक जुज़ या पारा पढ़ाया जाता है।

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नमाज़े तरावीह का तरीक़ा

जैसे हमने बताया नमाज़े तरावीह रमज़ान का चाँद दिखने वाली शाम को होने वाली ईशा नमाज़ से शुरू होता है और हर रोज़ ईशा नमाज़ के बाद से इसका वक़्त सुबह सादिक़ तक रहता है। यही सिलसिला तबतक चलता है जब ईद का चाँद न दिख जाए।

थोड़ा और बारीकी से बताऊँ तो जब आप नमाज़े तरावीह की नियत से ईशा के वक़्त जब आप मस्जिद में दाखिल होते हैं तो सबसे पहले ईशा की 4 रकात सुन्नत पढ़ी जाती है।

ईशा की 4 रकात सुन्नत के बाद इमाम के साथ ईशा की 4 रकात फर्ज़ पढ़ी जाती है।

4 रकात फर्ज़ के बाद 2 रकात सुन्नत और फिर 2 रकात नफल पढ़ते हैं। उसके बाद हम तरावीह शुरू करते हैं। जिसमें हम 2-2 रकात की नियत करते हैं। नियत कुछ इस तरह है-

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तरावीह की नमाज़ कैसे पढ़ें?

नमाज़ की नियत करें

नीयत की मैंने 2 रकात नमाज़े तरावीह की सुन्नत रसूले पाक (स०) की, वास्ते अल्लाह ताला के मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ पीछे इस इमाम के (अगर जमात में पढ़ रहे हैं तो पीछे इस इमाम के कहें वरना ना कहें)। अल्लाहु अकबर कहकर कियाम में खड़े हो जाएँ।

सना पढ़ें

सुबहानक अल्लाहुम्मा व बिहमदिका व तबारकसमोका व तआला जद्दोका व ल इलाहा गैरोका।

तअव्वुज़ और तस्मिआ पढ़ें

तअव्वुज़-
अऊज़ बिल्लाहि मिनस शैत्वानिर रजीम
तस्मिआ-
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

इमाम की किरअत सुनें

अभी इमाम किरअत करेगा उसकी किरअत को चुपचाप सुनें। और इमाम के अगले आदेश का इंतज़ार करें।

रुकू में जाएँ

इमाम किरअत ख़त्म करके अल्लाहु अकबर कहेगा और इसके साथ ही हमें भी रुकू में जाना है। रुकू में सुबहान रब्बि-अल अज़ीम पढ़ना है और फिर इमाम समी अल्लाहूलेमन हमदा कहकर रुकू से ऊपर खड़ा होगा तब आप रब्बना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाएंगे।

सज्दे में जाएँ

कियाम की हालत में इमाम अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएगा आप भी अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएँ और पढ़ें सुबहान रब्बि अल आला। ऐसे ही दो सज्दे होंगे। फिर तीसरी बार इमाम अल्लाहु अकबर कहते हुए कियाम की हालत में जाएगा और फिर से कुरआन की तिलावत शुरू करेगा और आप चुपचाप सुनेंगे। अभी दूसरे सज्दे तक अप वैसा ही करेंगे जैसे पहले किया।

तसहहुद में बैठें

दो रकात पूरी होने पर आप इमाम के साथ तसहहुद में बैठें और अत्तयहात पढ़ें-
अत्तहियातु लिल्लाहि वस्सलावातु वत्तैयिबातु अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाही व बरकातुहूअस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन’ ‘ अशहदु अल्ला-इलाहा इल्ललाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहु

इसके बाद दुरुदे इब्राहिमी पढ़ें-
अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यिदिना मुहम्मदिवँ व अला आलि सय्येदिना मुहम्मदिन कमा सल्लेता अला सय्यिदिना इब्राहिमा व अला आलि सय्यिदिना इब्राहिमा इन्नका हमीदुम मजीद। अल्लाहुम्मा बारिक अला सय्येदिना मुहम्मदिव व अला सय्यिदिना मुहम्मदिन कमा बारक-ता अला सय्यिदिना इब्राहिमा व झला आलि सय्यिदिना इब्राहिमा इन्नका हमीदुम मजीद

फिर दुयाए मासूरा पढ़ें-
अल्लाहुम-म इन्नी-जलम्तु नफ़्सी जुल्मन कसीरवं वला यगफिरुज्जुनुबा इल्ला अन्ता फग्फ़िरली मग्फिरतम् मिन अिन्दिका वरहमनी इन्नका अन्तलगफूरुहीम

सलाम फेरें

इसके बाद इमाम कहेगा अस्सलामो अलैकुम व रहमत उल्लाह और आप भी कहते हुए दोनों तरफ सलाम फेरेंगे।

इस तरह आप की दो रकात नमाज़ अदा होगी। इसके ठीक बाद आप फिर से तुरंत 2 रकात नमाजों की नियत करेंगे और इसी तरीके से 2 रकात नमाज़ पढ़ेंगे।

अब आपकी तरावीह की 4 रकात पूरी हो गयी हैं। इन 4 रकातों के बाद आप कुछ देर बैठेंगे और तरावीह की दुआ पढ़ेंगे।

नमाज़े तरावीह की दुआ

सुब्हा-नल मलिकिल कुद्दस ० सुब्हा-न जिल मुल्कि वल म-लकूत ० सुब्हा-न जिल इज्जती वल अ-ज-मति वल-हैबति वल कुदरति वल-किब्रियाइ वल-ज-ब-रूत ० सुब्हा-नल मलिकिल हैययील्लजी ला यनामु व ला यमूत ० सुब्बुहुन कुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर्रुह ० अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन्नारि ० या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर ०

नमाज़े तरावीह की दुआ
तरावीह की दुआ
तरावीह की दुआ

ये दुआ पढ़ने के बाद हम फिर से 2 रकात नमाज़ की नियत करेंगे और ये सिलसिला अगली 20 रकात नमाजों तक चलता रहेगा।

20 रकात नमाज़े तरावीह के बाद वित्र भी इमाम की इमामत में ही पढ़नी है। फिर उसके बाद बची हुई 2 रकात नफल पढ़ कर आप दुआ वगैरा मांग कर घर वापस आएंगे।

उम्मीद करता हूँ आप सभी इस रमज़ान नमाज़े तरावीह अता करेंगे और रमज़ान में ढेर सारी नेकियाँ कमाएंगे। अल्लाह आप सभी को इस रमज़ान इबादत की राह पर जमा के रखे और आप सभी की सेहत अच्छी रहे। आमीन।

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