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आयतुल कुर्सी हिंदी में – Ayatul Kursi In Hindi

अल्लाह का तार्रुफ़ अगर जानना है तो क़ुरान से बेहतर नुस्खा कोई नहीं है। पूरी क़ुरान में अल्लाह ने अपना तार्रुफ़ अलग नामों से और सिफ़्फ़तों से कराया है। मसलन अस्मा उल हुस्ना या रहमानिर रहीम या ग़फ़ूरुर रहीम। ऐसे बहुत से तरीकों से अल्लाह ने अपना तार्रुफ़ कराया है।

क़ुरान में भी एक आयत ऐसी है जिसमें अल्लाह ने बहुत ही शानदार तरीके से अपनी अज़मत और वक़ार का ज़िक्र किया है। ये आयत है सूरह अल बक़रह की आयत नम्बर २५५, जिसे हम आयतुल कुर्सी ( यहाँ हम पढ़ेंगे Ayatul Kursi in Hindi) के नाम से भी जानते हैं।

तो आइये पढ़ते हैं Ayatul Kursi In Hindi और उसको अच्छी तरह समझते हैं। ।

आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi in hindi)

اَللّٰهُ لَاۤ اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ-اَلْحَیُّ الْقَیُّوْمُ ﳛ لَا تَاْخُذُهٗ سِنَةٌ وَّ لَا نَوْمٌؕ-لَهٗ مَا فِی السَّمٰوٰتِ وَ مَا فِی الْاَرْضِؕ-مَنْ ذَا الَّذِیْ یَشْفَعُ عِنْدَهٗۤ اِلَّا بِاِذْنِهٖؕ-یَعْلَمُ مَا بَیْنَ اَیْدِیْهِمْ وَ مَا خَلْفَهُمْۚ-وَ لَا یُحِیْطُوْنَ بِشَیْءٍ مِّنْ عِلْمِهٖۤ اِلَّا بِمَا شَآءَۚ-وَسِعَ كُرْسِیُّهُ السَّمٰوٰتِ وَ الْاَرْضَۚ-وَ لَا یَـُٔوْدُهٗ حِفْظُهُمَاۚ-وَ هُوَ الْعَلِیُّ الْعَظِیْمُ

Surah Al Baqarah Ayat 255 (Ayatul Kursi)

अल्लाह उसके सिवा कोई माबूद नहीं। वह खुद ज़िंदा है, पुरे जगत का संभालने वाला है, उसको न ऊँघ आती है न निद्रा। उसी का है जो कुछ आकाशों में और पृथ्वी में है। कौन है जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना सिफारिश कर सके। वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है। और लोग उसके इल्म में से उतना ही हासिल कर सकते हैं जितना वो चाहे । उसकी कुर्सी आसमान और ज़मीन को अपनी वुसत में लिए हुए है । और इनकी हिफाज़त उसे थका नहीं सकती । और वही है ऊँची शान वाला, अज़मत वाला।

Surah Al Baqarah Ayat 255 (Ayatul Kursi)

अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहु (अल्लाह, उसके सिवा कोई माबूद नहीं )

आयत के इस हिस्से से अल्लाह सुब्हानहु व ताला अपनी वहदानियत का ज़िक्र करता है कि इस पुरे आलम में इस काबिल कोई भी नहीं है जिसकी इबादत की जा सके।

इताअत की इजाज़त है कि आप अपने माँ – बाप, अपने उस्ताद, अपने अमीर की इताअत करें मगर इबादत की हरगिज़ इजाज़त नहीं इबादत का हक़दार सिर्फ अल्लाह ही है कोई दूसरा नहीं। कोई उसके बराबरी का भी नहीं है।

हुअल हय्युल क़य्यूम (वह खुद ज़िंदा है और सभी को सँभालने वाला है )

आयत का ये हिस्सा अल्लाह की हमेशा रहने वाली ज़ात का ज़िक्र करती। अल्लाह हमेशा से था, है, और रहेगा। उसको किसी ने पैदा नहीं किया है बल्कि उसने पूरी दुनिया को बनाया है और वही सभी को संभालता है।

माज़ अल्लाह, बहुत से लोग ऐसे भी आते हैं जो ये कहते है कि अल्लाह कब आया और किसने उसे बनाया? मेरे नादान भाइयों अल्लाह अल्टीमेट ख़ालिक़ है। जो भी चीज़ इस पुरे कॉसमॉस में देखते हो सारी की सारी चीज़ें यहाँ तक कि आपके अहसासात भी अल्लाह ने ही बनायें है और वही इन्हे बरक़रार रखता है।

ला ता ख़ुज़ूहु सिनतुन्व व ला नौम (न उसे ऊंघ आती है न नींद )

आयत का ये हिस्सा अल्लाह रब्बे करीम की रुबूबियत को बयां करती है कि अल्लाह हर वक़्त जागता रहता है वो कभी सोता नहीं है। सोना तो दूर की बात है उसे ऊंघ भी नहीं आती है मतलब अगर हम उसके पलकें होने का तसव्वुर करें तो पलकें भी नहीं झपकाता है। इसका मतलब है कि वो कभी आराम नहीं करता है।

जैसा कि इससे पहले की आयत में कहा गया है कि वो सबका सँभालने वाला है, मतलब ये पूरी दुनिया उसी की क़ुव्वत से चल रही है जिसका तसव्वुर भी किसी नाचीज़ इंसान के दिमाग़ से परे है। अगर वो आराम करने लगे या उसे नींद आ जाये तो ये सारे निज़ाम में हलचल मच सकती है। (ये मेरी सोच है, बाकी अल्लाह बेहतर जानता है। )

लहू मा फ़िस समावाति व मा फिल अर्द (आसमानो ज़मीन में जो कुछ भी है सब उसी का है )

ये पूरा आलम बहुत ही बड़ा इस आलम में जो कुछ है चाहे वो आसमान में हो या ज़मीन में या फिर आपकी ज़ेहन में सभी कुछ अल्लाह का है। आज हम लोगों ने ये मेरा है ये तेरा है कह कह कर दुनिया में फसाद फैला रखा। जबकि सबकुछ अल्लाह का है।

आयत का ये हिस्सा ये बयां करता है की आखिरकार हक़ीक़ी बादशाह अल्लाह ही है।

मन ज़ललज़ी यसफओ इन्दहु इल्ला बेइज़्नीहि (कौन है जो उसके पास बिना उसकी इजाज़त के सिफारिश कर सके )

सिफ़ारिश , यहाँ हम अल्लाह से सिफारिश की बात करते हैं। किसी भी इन्सान या मख़लूक़ की क़ुदरत में नहीं की वो बिना अल्लाह की इजाज़त के कोई भी काम कर सके तो सिफ़ारिश इससे अलग कैसे हो सकती है।

अल्लाह क़ादिर है वो जिसको चाहे उसे सिफारिश करने का हक़दार बनाये जैसे अल्लाह सुब्हानहु व ताला हमारे आक़ा अपने महबूब मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को हश्र के दिन सिफारिश का हक़दार बनाया।

याअलमो मा बैना ऐइदीहीम व मा खल्फ़ाहुम् (वह जानता है सबकुछ जो उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है)

अल्लाह आलिमुल ग़ैब है। आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi in hindi) की इस आयत में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपने इल्मे ग़ैब का ज़िक्र किया है। अल्लाह हर वो चीज़ जनता है जो गुज़र चूका और जो गुज़र रहा है और जो आगे आने वाला है।

याद रहे अल्लाह के लिए कुछ भी ग़ैब नहीं है। लफ़्ज़े ग़ैब इंसानों के लिए है क्योंकि अल्लाह वो भी जानता है जो हमसे पोशीदा है। अल्लाह ने ही ये पूरी कायनात डिज़ाइन की है और उसे चला रहा है तो भला उससे कुछ पोशीदा कैसे हो सकता है। ये पोशीदगी ये ग़ैब इंसानों के लिए है।

व ला यूहीतूना बे शैइम मिन इलमिहि इल्ला बिमा शाअ ( और लोग उसके इल्म में से उतना ही हासिल कर सकते हैं जितना वो चाहे )

हम ग़ैब की बात कर रहे थे। आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi in hindi) के इस हिस्से में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपना तार्रुफ़ करते हुए बताया कि जाती इल्मे ग़ैब सिर्फ अल्लाह के पास है। वो जिसको जितना चाहे उसको उतना दे।

जैसे अल्लाह ने मदीने वाले आक़ा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को वही के ज़रिये कुफ्फार के मंसूबे के बारे में बताया।

जैसे ईसा अलैहि सलाम को मुर्दों को ज़िंदा करने का मोजिज़ा अता किया और दूसरे पैगम्बरों को भी अलग अलग मोजिज़्ज़े दिए।

वसिअ कुर्र्सीउहुस समावाति वल अर्द ( उसकी कुर्सी आसमान और ज़मीन को अपनी वुसअत (फैलाव ) में लिए हुए है । )

आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi in hindi) के इस हिस्से से हमें अल्लाह सुब्हानहु व ताला की बादशाहत की हद बताई गयी है। अल्लाह ताला की बादशाहत आसमानो ज़मीन के एक एक ज़र्रे पर है। इसका मतलब है कि अल्लाह ताला आसमानो ज़मीन के हर ज़र्रे में मौजूद है।

यहाँ आसमानो ज़मीन से मुराद तमाम कायनात से है फिर चाहे वो हमारी दुनिया हो या खला (अंतरिक्ष) की दुनिया हो।

व ला यऊदुहु हिफ्ज़ुहुमा (इनकी हिफाज़त उसको थका नहीं सकती )

इससे पहले वाले हिस्से में हमने देखा कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बादशाहत की वुसअत अयन की गयी है। अब बात आती है इतनी वसीअ सल्तनत का रखरखाव उसकी हिफाज़त। क्या अल्लाह इससे थकता नहीं है ?

जी नहीं अल्लाह की कुुव्वत महदूद नहीं है ये बेहिसाब है और कभी न ख़त्म होने वाली है। तो ऐसे में थकान, सुस्ती, माज़ अल्लाह, अल्लाह इन सबसे पाक है।

व हुअल अलीउल अज़ीम ( और वही है ऊँची शान वाला, अज़मत वाला। )

आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi in hindi) का ये हिस्सा आखिरी है और अल्लाह ताला की ऊँची शान और उसकी अज़मत बयां की गयी है। अल्लाह सबसे ऊँची शान वाला है। ये पूरी कायनात के ज़र्रे-ज़र्रे में हर वक़्त मौजूद है।

या मेरे रब इसे लिखने में मुझसे या पड़ने वाले से कोई गलती हुई तो माफ़ फ़रमा।

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