Charity in Ramadan Kareem- रमज़ान में सदकात की अहमियत

इस्लाम हमें सिखाता है कि सदका करने से उसके साथ हमें बेहतर सवाब मिलता है। Charity in Ramadan Kareem मोमिनीन के लिए एक मौका होता हैं कि वो अपना हाथ बढ़ाएँ और ज़रूरतमंदों कि मदद करें।

Charity मोमिन का साया

हमारे नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया-

क़यामत के दिन मोमिन का साया उसका सदका होगा ।

अत-तिरमिजी

सदका करना हम मुसलमानों के लिए एक reminder कि तरह है जो ये याद दिलाता है कि इंसानियत कि खातिर हमें उन लोगो कि ज़रूरतें पूरी करनी चाहिए जो हमारी तरह भरे पूरे नहीं हैं।

बहुत सी तंजीमें ऐसी हैं जो सदका जारिया का काम सिर्फ Ramadan Kareem में ही नहीं करते बल्कि पूरे साल उनका ये सिलसिला चलता रहता है।

Charity in Ramadan Kareem, इफ्तार की दावत, ज़रूरी खाने कि चीज़ें, सहरी की दावत वगैरा की शक्लों में होते हैं। Charity in Ramadan Kareem के लिए आप इन तंजीमों को पैसे से इमदाद करके या और भी बेहतर होगा कि आप खुद ज़ाती तौर पर हिस्सा लेकर इन सदका का फ़एदा उठा सकते हैं।

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ऊपर का हाथ नीचे के हाथ से बेहतर होता है

एक खुशी के आंसुओं से भरी आँखें और मुसकुराता हुआ चेहरा देखने से ज़्यादा बेहतर और आजिज़ाना क्या होगा जो आपकी एक छोटी सी कोशिश कि वजह से मिली हो?

आपके लिए शायद सिर्फ 1000 रुपये होंगे, मगर एक ज़रूरतमन्द, उन 1000 रुपयों से से अपने लिए वो खुशियाँ खरीद सकता है जो उसके लिए लंबे समय तक चलेंगी। हमारे नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया-

ऊपर का हाथ नीचे के हाथ से बेहतर होता है। ऊपर का हाथ देने वाले का होता है और नीचे का हाथ एक फकीर का होता है।

सही अल-बुखारी

खैराती इक़दामात में ताऊन करना अपने मेहनत से कमाई हुई रकम को सही मकसद के लिए खर्च करने का बहुत ही अच्छा तरीका है।

याद रहे, हर सदका अपने घर से शुरू होता है। तो याद करके अपने घर कि ज़रूरत के लिए एक ज़रूरी रकम और राहत के सभी सामान मुहय्या करा दें।

ये रकम न सिर्फ उनकी हौसला अफजाई करेगी बल्कि पूरे महीने होने वाले उनके खर्चों को भी पूरा करेगी। ये उनके ईमान को अल्लाह की तरफ और मजबूती से जोड़ देगा कि अल्लाह अपने किसी न किसी नेक सखी बंदे को लोगों कि मदद के लिए ज़रूर भेजता है। यहाँ इस कसे में वो नीक और सखी बंदा आप खुद होगे।

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हम जितना देंगे उतना ही अल्लाह हमें देगा

हम जितना देंगे उतना ही अल्लाह हमें देगा, इस दुनिया में और हमारी जिंदगी के बाद भी। उसकी किसी मख़लूक़ के लिए राहत का जरिया बनना भी हमारे गुनाहों को माफ करने में मदद करता है और हमें और भी सवाब का मुस्तहब बनाता है।

इसमें कोई शक-ओ-शुब नहीं कि charity मेहनतकशी को आसान बनाता है। इस दुनिया में charity हमारे लिए एक ढाल कि तरह काम कर सकती है जो हमें बुरी नज़र से बचाता है।

अपने ये तो ज़रूर सुना होगा, हिफाज़त इलाज से बेहतर है। इसलिए हमें किसी सदके के लिए किसी तरह कि मुसीबत या परेशानी या फिर अलह के इम्तिहान का इंतिज़ार नहीं करना चाहिए बल्कि सदका करने कि आदत डाल लेनी चाहिए जो हमें मुसीबतों के वक़्त हिम्मत देगी।

हम खुद ही अपनी आदत में शामिल करके हर महीने कुछ रकम नेक नियत से सदका कर सकते हैं जिसके बदले अल्लाह रब्बुल इज्ज़त हमें सवाब देगा। अल्लाह ताला कुरान में फरमाता है-

वो जो जो अपनी दौलत को रात दिन, खुलकर या छिपकर अल्लाह कि राह में खर्च करते हैं, उन्हे उनका अल्लाह उसका सवाब ज़रूर देगा। और उन्हें किसी बात का डर नहीं होगा और न वो दुखी होंगे।

सूरह अल-बकरह आयत 274

राहत के रास्ते

आप खुद पाएंगे कि कैसे अल्लाह सुबहानहु व ताला आपके लिए बहुत सी छीजे आसान कर देगा जब आप अपनी कमाई का एक छोटा सा हिस्सा दूसरे कि मदद के लिए निकलते हैं। और ये काम हम Ramadan Kareem में खासकर करते हैं जिसे हम, सदका या ज़कात के रूप जानते हैं।

इस्लाम ने अपने सभी बंदों जिसको अता किया है उसपर उसकी कुल इजाफ़ी दौलत का 2.5% फर्ज़ है। आपकी कमाई में हुई बरकत और इजाफ के लिए ज़कात देकर अल्लाह का शुक्रिया अदा करो।

ज़कात एक reminder कि तरह है जो हमें ये बताता है कि इस दुनिया हमने जो भी पाया है सब सिर्फ अल्लाह कि मर्ज़ी से है। अगर हमें और ज्यादा दौलत की नवाजिस होती है तो इसका मतलब है कि अल्लाह चाहता है हम और सदका करें।

Charity की शक्लें

Charity in Ramadan Kareem बहुत से रूप में आती है। कोई भी ऐसा काम जो दूसरों के लिए राहत का जरिया बने, charity ही मानी जाएगी। इसमें छोटे अमल जैसे किसी कि तरफ देखकर प्यार से मुसकुराना से लेकर किसी ज़रूरतमंद को माली फ़ायदा देना तक शामिल है।

लोगों से अच्छे सुलूक करना उनसे प्यार से पेश आना और जब सबसे ज्यादा ज़रूरत हो तब उनके पास रहना भी charity ही है। एक दरख्त लगाना भी charity में ही शुमार किया जाता है क्योंकि कोई न कोई इससे फ़ायदा ज़रूर लेगा चाहे वो इसके छांव कि रूप में ही न हो। आपको उस charity का सवाब ज़रूर मिलेगा।

हमारे नबी मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया-

हर शख्स के हर जोड़ पर हर रोज़ एक सदका तुलू होता है जैसे सूरज तुलू होता है। दो लोगों के बीच अद्ल से पेश आना एक सदका है, किसी आदमी की उसके काम में मदद करना सदका है, उसे उठाना या उसके सामान को उठाना सदका है, एक नेक लफ़्ज़ सदका है, रास्ते से नुकसान वाली चीज़ हटाना सदका है।

अल-बुखारी, मुस्लिम

इस Ramadan Kareem में अल्लाह के रास्ते पर उसका दिया हुआ माल ( दौलत, ताकत, वक़्त) खर्च करके इसे और भी फायदेमंद बनाएँ। Charity in Ramadan Kareem करके अपने लिए तरक्की का रास्ता खोलें

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