ख़तमल्लाहो अला कुलूबेहिम (Khatamallaho Alaa Quloobehim)- सूरह अल फ़ातिहा आयात 7 की तफ़सीर

“Khatamallaho alaa Quloobehim wa alaa sam-e-him, wa ala absarehim gisawatunv walahum azaabun azeem.”

Surah Al Baqrah Verse 7

“खतमल्लाहो अला कुलूबेहिम व अला सम-एहिम, व अला अब्सारेहिम गीसावतुन्व, वलहुम आज़ाबुन अज़ीम”

तर्जुमा कंजूल इरफान – अल्लाह ने इनके दिलों पर और उनके कानों पर मुहर लगा दी है और इनके आंखो पर पर्दा पड़ा हुआ है और इनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब है।


इससे पहले की आयत, आयत नंबर 6 मे अल्लाह रबबूल इज्ज़त ने बताया कि एक काफिर को कितना भी समझा लो डरा लो वो ईमान नहीं लाएगा। इस आयत मे अल्लाह ताला ने ये इरशाद फरमाया है कि वो क्यों ईमान नहीं लाने वाले हैं।

इस आयत मे अल्लाह ताला ने काफिरों के ईमान न लाने कि वजह का ज़िक्र किया है। अल्लाह ताला ने फरमाया है कि हमने इनकी दिलों पर मुहर लगा दी है। ताकि वो ईमान के एहकामात से लगाओ न कर पाएँ।

अल्लाह ने ये भी फरमाया कि उनके कानों पर मुहर लगा दी है जिससे वो इसलाह कि बात न सुन पाएँ। और उनके आँखों पर पर्दे डाल दिये है जिससे उनको हक़ दिखाई न दे।

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने फरमाया, ऐसे लोगों के लिए बहुत बड़ा अज़ाब है।

KhatamAllaho: मुहर लगा दी है

Khatamallaho से जैसा ऊपर बयान है, उन काफिरों के ईमान से महरूम रहने कि वजह ये है कि अल्लाह ताला ने उनके दिलों और उनके कानों पर मुहर लगा दी है।

इस मुहर कि बिना पर ये न हक़ समझ सकते हैं, न हक़ सुन सकते हैं और न ही इससे नफ़ा उठा सकते हैं। उनके दिलों पर पर्दा पड़ा हुआ है जिसकी वजह से ये अल्लाह ताला कि आयात और उसकी वहदानीयत के दलाइल देख नहीं सकते। और इनके लिए आखिरत मे बहुत बड़ा अज़ाब है।

कुछ काफिर ईमान से महरूम क्यों रहे?

यहाँ ये बात याद रखनी चाहिए कि जो काफिर ईमान से महरूम रहे उनपर हिदायत की राहें शुरू से बंद न थीं। वरना वो इस बात का भी बहाना बना सकते थे।

बल्कि असल ये है कि उनके कुफ़्र व इनाद, सरकशी व बे दीनी, हक़ कि मुखालफत, और अंबियाय किराम से मुखालफत और अंबियाय किराम से अदावत के अंजाम के तौर पर इनके दिलों और इनके कानों पर मुहर लगी और आँखों पर पर्दा पद गए।

ये ऐसे है जैसे कोई शख्स डॉक्टर कि मुखालफत करे और जानलेवा ज़हर खा ले और उसके लिए दवा फायदेमंद ना रहे। और डॉक्टर ये कह दे कि अब ये तंदरुस्त नहीं हो सकता।

तो हक़ीक़त में उस आदमी को इस हाल तक पहुँचाने में इस आदमी के अपनी करतूतों का हाथ है। ना कि डॉक्टर के कहना का लहज़ा।

वह खुद ही मलामत का मुस्तहक है डॉक्टर पर ऐतराज नहीं कर सकता।

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