Taraweeh in Ramadan Kareem (5 Most Beneficial Reasons to Pray) (हिन्दी में)

Taraweeh in Ramadan Kareem माहे Ramadan की सबसे अहम अशियायों में से एक है। रोज़ा रहने के अलावा और गुनाहों से दूर रहने के अलावा एक और बहुत बरकत वाली चीज़ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने इस महीने में दी है और वो है taraweeh in Ramadan Kareem.

हालांकि, तरावीह को पूरे महीने एक ही जोश और जुनून के साथ पढ्ना थोड़ा कठिन हो सकता है। खुशकिस्मती से, अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने साफ नियत और पाक शिद्दत के साथ Ramadan Kareem में अपने लिए बनाए गए सारे goals को पूरा कर पाना आसान बना दिया है।

Ramadan Kareem में तरावीह पर मुस्तकिल होना क्यूँ है ज़रूरी? आइए इस 5 फायदेमंद कारणों के साथ जानते हैं।

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1. पूरी रात सवाब पाएँ।

Taraweeh in Ramadan Kareem, अल्लाह रब्बुल इज्ज़त से पूरी रात सवाबात और बरकात पाने का बहुत ही अच्छा मौका है। हम मुस्लिमों को अपने गुनाहों से जो हमसे गलती से या जान बूझकर होते हैं उनको खत्म करने के लिए हमेशा सवाबों की ज़रूरत रहती है। ऐसे में Taraweeh in Ramadan Kareem हमारे लिए अल्लाह के तरफ से भेजी हुई एक बाबरकत सौगात है। हमारे नबी मुहम्मद (स०) फरमाते हैं-

जो भी इमाम के साथ आखिर तक तरावीह की नमाज़ पढ़ता है अल्लाह उसकी पूरी रात की नमाज़ दर्ज करता है।

सही अल-अल्बानि

2. सारे गुनाह माफ हो जाएंगे

फर्ज़ करो, आप हर रात अल्लाह की बारगाह में घंटों खड़े होकर नमाज़ अता करते हो, तो कैसे न वो आपके गुनाहों को माफ करे जो एक छोटे से सवाब के बदले बड़े से बड़ा गुनाह माफ कर सकता है। Ramadan Kareem की रातों में अल्लाह आपके वो गुनाह भी माफ कर देता है जिन्हें आप सोचते थे कि कभी माफ नहीं किए जा सकते थे।

इस पर नबी अकरम मुहम्मद (स०) ने फरमाया है-

जो भी Ramadan Kareem कि रातों में इबादत करता है और पूरे ईमान के साथ अल्लाह से उसके बदले सवाब कि तलब करता है तो उसके सारे पिछले गुनाह माफ कर दिये जाते हैं।

अल-बुखारी और मुस्लिम

3. एक अच्छी वरजिस

हमारे लिए आलसी होना और हमारा जिस्मानी और रूहानी तौर पर सुस्त हो जाना कुदरती है। Taraweeh in Ramadan Kareem पर मुस्तकिल होना हमें चुस्त और फुर्त रखता है।

ये हमें जिस्मानी फायदे हासिल करने में में मदद करता है। क्यूंकी तरावीह अता करने के लिए जो हम खड़े होते हैं या फिर रुकू और सजदा करते हैं तो वो खुद में एक एक्सर्साइज़ जैसी है जो खुद अल्लाह ताला ने हमारे लिए मुयय्यिन की है।

इफ़तार के बाद जब आप खा पीकर फटने कि हालत में होते हो ऐसे में ये एक्सर्साइज़ आपके लिए और भी फायदेमंद साबित होती है।

खातमुन्नबी मुहम्मद (स०) ने इन इबादतों को राहत का एक जरिया समझा जो हमें रोज़मर्रा की गलतियो और गुनाहों में पिसने से बचाता है। वो अपने मु-अज़्ज़िन हज़रत बिलाल से कहा भी करते थे-

“लोगों को नमाज़ के लिए बुलाओ , ताकि हम नमाज़ पढ़कर राहत को पा सकें। ”

4. फर्ज़ नमाजों की खामियों की अदाएगी

तरावीह हमें हमारी फर्ज़ नमाजों में हुई खामियो कोताहीयों को दुरुस्त करने का बहुत ही अच्छा मौका देती है। अगर आप इसपर मुस्तकिल हो तो आप इसका ज्यादा से ज्यादा फायेदा उठा सकते हो। फ़ायदा उठाने का एक बहुत ही अच्छा मौका है। है कि नहीं?

अल्लाह के रसूल मुहम्मद (स०) से फरमाते हैं, जब कोई इंसान हश्र के दिन अल्लाह के सामने खड़ा होगा और उसकी फर्ज़ नमाजें कम पड़ रही होंगी तब अल्लाह कहेगा,

“देखो क्या मेरे बंदे कि कोई और ऐसी नमाज़ है जो उसने मेरी रज़ा के लिए पढ़ी हो जो उसकी फर्ज़ नमाजों कि कमी को पूरी कर सकती हो। “

सही तिरमिज़ी

5. कुरान पाक सुनने का मौका

Taraweeh in Ramadan Kareem में पाक कुरान कि किर-अत कि जाती है, जिसे नमाज़ के दौरान इमाम शुरू से आखिर तक एक तरतीब से पढ़ता है और मुकतदी उसे सुनते हैं।

ये अमूमन 25th-27th Ramadan में मुकम्मल कि जाती है, और हमें इस पाक किताब को सुनने और कुछ हिस्से याद करने का एक बहूत ही अच्छा मौका देती है।

आप तरावीह इमाम के पीछे पढ़ सकते हैं या फिर अपनी सहूलियत के हिसाब से अपने घर पर भी अता कर सकते हैं।


ये बात हमें जरूर याद रखनी चाहिए कि नमाजें पढ़ना, फिर चाहे वो Taraweeh in Ramadan Kareem हो या फिर फर्ज़ नमाजें, उन्हें पढ़ना सिर्फ Ramadan में ज़रूर नहीं है बल्कि हमारी पूरी ज़िंदगी में ज़रूरी हैं।

अल्लाह सुबहानहु व ताला हमें तरावीह पर मुस्तकिल होने कि कुव्वत दे और हमें नमाज़े पंजगाना का आदि बनाकर उन्हे बेहतर ढंग से पूरा करने कि ताकत दे।

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